23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के छठे दिन ‘कर्मयोगी’ पुस्तक का हुआ भव्य विमोचन
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दास्तानगोई और जल संरक्षण पर केंद्रित रही शाम
लखनऊ: बलरामपुर गार्डन (अशोक मार्ग) में चल रहे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के छठे दिन अध्यात्म, साहित्य और कला की त्रिवेणी देखने को मिली। ‘आध्यात्मिक जीवन हमें दुनिया से दूर नहीं करता, बल्कि और गहराई में ले जाता है’—इसी मूल भावना को चरितार्थ करती आध्यात्मिक पुस्तकें मेले में पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। यह मेला आगामी 11 अक्टूबर तक रोजाना सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा, जहाँ सभी पुस्तकों पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्टालों पर उमड़ रही पाठकों की भीड़
मेले में रामकृष्ण मठ, गायत्री ज्ञान मंदिर, आर्य प्रतिनिधि सभा, गीता प्रेस और सत्य मार्ग जैसे स्टालों पर अध्यात्मप्रेमियों की भारी चहल-पहल है। रामकृष्ण मठ में स्वामी विवेकानंद, स्वामी अपूर्वानन्द तथा स्वामी अभेदानन्द की योग व ध्यान से जुड़ी पुस्तकें सुलभ हैं। गायत्री ज्ञान मंदिर में आचार्य श्रीराम शर्मा की वेदों व उपनिषदों की व्याख्यात्मक कृतियाँ आठ रुपये की शुरुआती कीमत पर मिल रही हैं। वहीं, आर्य प्रतिनिधि सभा के स्टाल पर महर्षि दयानंद सरस्वती की ‘सत्यार्थ प्रकाश’ मात्र 30 रुपये में उपलब्ध है। इसके अलावा गीता प्रेस, रीतेश बुक, पैराडाइज बुक, सत्य मार्ग तथा गिडियंस (जहाँ बाइबिल नि:शुल्क दी जा रही है) के स्टालों पर भी विभिन्न संप्रदायों और महापुरुषों का साहित्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

‘कर्मयोगी’ पुस्तक का विमोचन, दास्तानगोई और जल संरक्षण पर परिचर्चा
मेला मंच पर संध्या सत्र में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विवेक शुक्ल द्वारा अपने पिता जस्टिस उमेश दत्त शुक्ल के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘कर्मयोगी’ का विमोचन किया। उपमुख्यमंत्री ने स्व. जस्टिस शुक्ल की निष्ठा और कर्मठता को याद किया। मेला मंच पर आज शाम विवेक शुक्ल की पिता जस्टिस उमेश दत्त शुक्ल पर लिखी पुस्तक ‘कर्मयोगी’ का विमोचन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। उन्होंने कहा- अपने अध्ययन के दौरान मैंने न्यायाधीश उमेश दत्त जी को विभिन्न पदों पर काम करते उनकी कर्मठता को देखा है। लेखक विवेक ने बताया कि लेखन में मुझे मां वीना शुक्ला और पत्नी नीना शुक्ला का बहुत सहयोग मिला।कार्यक्रम में डीएस शुक्ल, डा.अमिता दुबे, अलका प्रमोद, हरिमोहन बाजपेयी माधव, अजय कुमार मिश्र व मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने विचार व्यक्त किये। सांस्कृतिक संध्या में अरशाना अज्मत ने दास्तानगोई के माध्यम से प्रसिद्ध उर्दू लेखिका इस्मत चुग़ताई और मंटो के जीवन-प्रसंगों को जीवंत किया। इसके साथ ही मीनू खरे के संयोजन में आयोजित ‘ब्लू ड्रॉप’ कार्यक्रम में डॉ. जया तिवारी के ‘मेरी जिंदगी’ बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की संगीतमय प्रस्तुति दी तथा गोमती नदी, सई, कुकरैल और लखनऊ के ऐतिहासिक जलस्रोतों (शाही बावली, टिकैत राय तालाब, मोतीझील आदि) के संरक्षण पर परिचर्चा की गई।

