कला-संस्कृति के संरक्षण को समर्पित ‘अवध संध्या’, मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने बताया लखनऊ की धरोहर
डॉ. इन्द्रेश के शास्त्रीय गायन, कथक केंद्र के ‘कजरी के रंग’ और मलखंब के हुनर ने समारोह में लगाए चार चांद
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कला-संस्कृति संरक्षण नीति और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा मंगलवार, 6 अक्टूबर को ‘अवध संध्या’ का भव्य आयोजन संत गाडगेजी ऑडिटोरियम में किया गया। संस्कृति विभाग के विभिन्न संस्थानों के सहयोग से छह वर्ष बाद पुनः शुरू हुए इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री मालिनी अवस्थी उपस्थित रहीं।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक राज कुमार ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस अवसर पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी को एक स्थानीय कलाकार द्वारा हाथों से बनाई गई उनकी पेंटिंग भेंट की गई। अपने संबोधन में मालिनी अवस्थी ने ‘अवध संध्या’ की पुनर्शुरुआत पर बधाई देते हुए इसे लखनऊ की अनमोल धरोहर बताया और सोशल मीडिया के जरिए इसे अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने का सुझाव दिया। अकादमी उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कार्यक्रम के वृहद स्वरूप, आगामी कार्यशालाओं और संगीत प्रतियोगिताओं की जानकारी दी।
डॉ. अलका निवेदन के संचालन में सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गाजियाबाद के डॉ. इन्द्रेश कुमार मिश्रा के मधुर शास्त्रीय गायन “धीरे धीरे से झुलाओ मोरे प्यारे ललना” से हुई। इसके बाद कथक केंद्र के कलाकारों ने श्रुति शर्मा, नीता जोशी और रजनी वर्मा के नृत्य निर्देशन में ‘कजरी के रंग’ की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इसमें पंडित बड़े रामदास जी रचित राग मेघ और तीन ताल में निबद्ध “बादल गरज नभ घोर शोर”, पंडित बिंदादीन महाराज रचित राग देश और रूपक ताल में “झूलत राधे नवल किशोर” सुनाकर आनंदित किया।

मिर्जापुरी कजरी “घेरि घेरि आयी सावन की बदरिया” और नाथद्वारा परंपरा का हवेली संगीत “रंग रंगीली छैल छबीलो” गा कर प्रभावित किया। संगीतकार कमलाकांत के संगीत निर्देशन में हुई इस कथक प्रस्तुति में तबले पर डॉ. राजीव शुक्ला, बांसुरी पर दिगंत सैकिया और ढोलक पर दीपक कुमार ने संगत की। नृत्य टीम में प्रशिक्षकों के साथ प्रियम यादव, ऐशिनी पाठक, मानवी वर्मा, एकता कश्यप, सृष्टि पाण्डेय, अंशिका, नंदिनी, स्वरा, कनक, आरती और भूमि शामिल रहीं।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण झांसी के रवि प्रकाश परिहार एवं दल द्वारा प्रस्तुत ‘मलखंब’ रहा। शक्ति और शारीरिक संतुलन के इस हैरतअंगेज हुनर ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, राज्य ललित कला अकादमी और राज्य संग्रहालय द्वारा ‘अवध’ थीम पर लगाई गई प्रदर्शनी को भी आगंतुकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में अतुल द्विवेदी (निदेशक, जनजाति संस्कृति संस्थान) और डॉ. राकेश सिंह (निदेशक, बौद्ध शोध संस्थान) समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

