उन्होंने चुनाव प्रणाली, महंगाई और विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ के उर्मिला गार्डन के उद्घाटन समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने चुनाव प्रणाली, महंगाई और विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया। इस मौके पर पूर्व सांसद कुंवर देवेंद्र सिंह चौधरी और उनके समर्थकों की समाजवादी पार्टी में घर वापसी भी हुई।
1. चुनाव और परिसीमन पर गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा पर विपक्षी नेताओं को रोकने के लिए चुनावी धांधली करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बंगाल में चुनाव लूटने की कोशिश की और बिहार चुनाव में बेईमानी की। सपा प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यही लूट और बेईमानी उत्तर प्रदेश में भी हो गई, तो देश में भविष्य में कभी चुनाव नहीं होंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन (डिलिमिटेशन) लाने का असल मकसद ऐसी लोकसभा सीटें तैयार करना है, जिससे विपक्ष के बड़े नेता चुनाव न जीत सकें।
2. पंचायत चुनावों में देरी और ग्रामीण आक्रोश
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा की हार तय है, इसीलिए वे डरे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनाव टालने की असली वजह यह है कि सरकार का ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला पूरी तरह फेल हो चुका है। किसानों की समस्याएं: गांव के लोग खाद की किल्लत, डीजल के बढ़ते दाम और स्मार्ट मीटर के नाम पर होने वाली कथित लूट से परेशान हैं और भाजपा को सबक सिखाने का इंतजार कर रहे हैं।
3. केंद्र के 12 साल: “ऐतिहासिक महंगाई और मिलावट”
केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यकाल की एकमात्र उपलब्धि ‘ऐतिहासिक महंगाई’ है। उन्होंने कहा कि आज खाद, रसोई गैस सिलेंडर और ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल के दाम कम करने के बजाय उसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल की मिलावट की जा रही है, जो जनता के साथ धोखा है।
4. विदेश नीति और ‘मेक इन इंडिया’ पर निशाना
पश्चिमी एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और वहां भारतीय नागरिकों की मौत को लेकर अखिलेश यादव ने केंद्र की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया। “अगर हमारी विदेश नीति मजबूत होती और भारत इस युद्ध को रुकवाने में कामयाब रहता, तो न तो हमारे नागरिकों की जान जाती और न ही देश की अर्थव्यवस्था पर कोई संकट आता। यदि सरकार ऐसा कर पाती, तभी प्रधानमंत्री को सही मायनों में ‘विश्व गुरु’ माना जाता।”
‘मेक इन इंडिया’ के नारे पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग “मुंह से स्वदेशी और मन से विदेशी” हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए पूछा कि जो ‘अनरजिस्टर्ड’ लोग पहले दिन-रात स्वदेशी का राग अलापते थे, वे आज देश के इस आर्थिक हालात पर खामोश क्यों हैं?

