लखनऊ छावनी के सूर्या ऑडिटोरियम में गूंजा योग का संदेश: लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन जोशी ने दिया “योगिक जीवन शैली” पर प्रेरक व्याख्यान

Prashant

June 13, 2026

लखनऊ छावनी स्थित सूर्या ऑडिटोरियम में “योगिक जीवन शैली” विषय पर हुआ व्याख्यान

इस विशेष सत्र में बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारजन शामिल रहे

लखनऊ। भारतीय सेना अपने जवानों और उनके परिवारों के शारीरिक व मानसिक कल्याण के लिए लगातार प्रयासरत रहती है। इसी कड़ी में लखनऊ छावनी स्थित सूर्या ऑडिटोरियम में “योगिक जीवन शैली” विषय पर एक बेहद प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र में बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारजनों ने हिस्सा लिया।

इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन जोशी थे, जिन्होंने पूरे सत्र का बेहद प्रभावी ढंग से संचालन किया। लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी सेना में एक प्रतिष्ठित शारीरिक प्रशिक्षण अधिकारी होने के साथ-साथ प्रख्यात हठयोग विशेषज्ञ हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक हैं। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं।

उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों, अनुभवों और शानदार उपलब्धियों को साझा करते हुए योग, आत्म-अनुशासन और मानसिक दृढ़ता के महत्व को समझाया। उन्होंने बेहद सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया कि कैसे व्यस्त दिनचर्या के बीच भी योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाया जा सकता है।

‘आहार, व्यवहार और विचार’ का संतुलन है जीवन का आधार

लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि एक स्वस्थ और सफल जीवन के लिए तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं—आहार, व्यवहार और विचार। “जीवन के प्रत्येक क्षण और शरीर के प्रत्येक कण पर निरंतर कार्य करना आवश्यक है। जब व्यक्ति का आहार, व्यवहार और विचार तीनों योगमय हो जाते हैं, तभी वास्तविक शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति संभव है।”

सैनिकों के लिए मानसिक सुदृढ़ता जरूरी

सैन्य जीवन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक सशक्त सैनिक केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत होना चाहिए। सकारात्मक सोच और आत्म-अनुशासन ही विषम परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं। व्याख्यान के दौरान उनके एक खास संदेश ने हॉल में मौजूद हर शख्स को भीतर तक झकझोर दिया। जतन नहीं करोगे तो पतन हो जाएगा, चाहे वह तन का हो, धन का हो, मन का हो या वतन का हो।” सैनिकों और उनके परिवारों ने इस संदेश को अपने जीवन और ‘सैनिक धर्म’ दोनों के लिए अत्यंत प्रासंगिक और मार्गदर्शक बताया।

संवाद सत्र और सकारात्मक प्रतिक्रिया

व्याख्यान के बाद एक ‘सवाल-जवाब’ (संवाद) सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल जोशी ने प्रतिभागियों के मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए और दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने के जरूरी टिप्स साझा किए। कार्यक्रम में मौजूद सभी अधिकारियों और परिजनों ने इस आयोजन की जमकर सराहना की। इस व्याख्यान को न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से, बल्कि बेहतरीन जीवन प्रबंधन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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