विश्व पर्यावरण दिवस (वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे 2026) के वैश्विक संदेश को आत्मसात किया
एलयू में प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक अनूठी और व्यवाहारिक पहल की शुरुआत हुई
लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस (वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे 2026) के वैश्विक संदेश को आत्मसात करते हुए लखनऊ यूनिवर्सिटी में आज प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक अनूठी और व्यवाहारिक पहल की शुरुआत की गई। यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाइल्डलाइफ़ साइंसेज के प्रोग्राम सेंटर ने ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट और नीवा फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर परिसर में कपड़े के बैग बांटने का एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रोजमर्रा की जिंदगी में सस्टेनेबल लाइफ़स्टाइल (सतत जीवन शैली) को बढ़ावा देना और पर्यावरण के लिए नासूर बन चुके सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह से कम करना है।
वीसी प्रो. जे. पी. सैनी ने किया उद्घाटन, बांटे 50 कपड़े के बैग
इस जागरूकता कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन लखनऊ यूनिवर्सिटी के माननीय वाइस-चांसलर प्रो. जे. पी. सैनी ने किया। उन्होंने इस मुहिम को जमीन पर उतारने के लिए यूनिवर्सिटी के क्लास III और क्लास IV के कर्मचारियों को 50 दोबारा इस्तेमाल होने वाले कपड़े के बैग बांटे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों और स्टाफ को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. सैनी ने जोर देकर कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रोडक्ट्स आज हमारे पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इनसे बचने के लिए हम सभी को अपनी आदतों में सुधार करना होगा और पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) विकल्पों को अपनाना होगा ताकि बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।
‘मिशन LiFE’ के लक्ष्यों को मिलेगी मजबूती
यह पूरा आयोजन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के वैश्विक संदेश—’क्लामेट एक्शन, सस्टेनेबल खपत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार आदतें’—के तहत किया गया। कपड़े के बैग बांटने की यह मुहिम सीधे तौर पर भारत सरकार के “मिशन LiFE” (लाइफ़स्टाइल फ़ॉर एनवायरनमेंट) के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करती है। ‘मिशन LiFE’ के तहत आम नागरिकों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित रिसर्च स्कॉलर्स और छात्रों को जागरूक किया गया कि वे किस तरह सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को ‘ना’ कहकर (Say No to Single-Use Plastic) प्रकृति के संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं।
इकोसिस्टम और मानव सेहत पर प्लास्टिक के बुरे असर से कराया अवगत
प्रोग्राम के दौरान फैकल्टी मेंबर्स और एक्सपर्ट्स ने हमारे इकोसिस्टम, वन्यजीवों (वाइल्डलाइफ़) और खुद इंसानी सेहत पर सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से होने वाले गंभीर व जानलेवा नुकसानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लोगों को प्रेरित किया गया कि वे जब भी घर से बाहर निकलें, अपने साथ कपड़े का थैला जरूर रखें।

कार्यक्रम में चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, एडिशनल प्रॉक्टर प्रो. ओ. पी. शुक्ला, डॉ. राहुल पांडे, प्रो. शर्मा, डॉ. शुबन आलम, प्रो. मनीषा बनर्जी और प्रो. रीता चौधरी समेत बड़ी संख्या में फैकल्टी मेंबर्स, यूनिवर्सिटी स्टाफ, रिसर्च स्कॉलर्स और स्टूडेंट्स मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा लिए गए एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और एक साफ-सुथरे, हरे-भरे व टिकाऊ भविष्य के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की शपथ ली।
पाँच दिवसीय वृक्षारोपण अभियान में रोपे गए 72 पौधे
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में लखनऊ विश्वविद्यालय में 1 से 5 जून तक सप्ताहव्यापी वृक्षारोपण अभियान चला। यह आयोजन ईआईएसीपी केन्द्र (आईडब्ल्यूएस), नीवा फाउंडेशन और प्राणी विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण जागरूकता व सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। प्रो अमिता कनौजिया ने बताया कि विश्वविद्यालय के अलग-अलग परिसरों में कुल 72 पौधे लगाए गए। प्राणी विज्ञान विभाग (6), डीएसडब्ल्यू कार्यालय (6), 18 छात्रावास परिसर (54), ओएनजीसी सीएएस भवन (3) तथा प्रशासनिक भवन परिसर (3)। अभियान का समापन कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने चन्दन, रुद्राक्ष और सिन्दूर के पौधे लगाकर किया। इस अभियान में 500 से अधिक शिक्षकों, छात्रों व अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने भाग लिया और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

