यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- ओबीसी आरक्षण में दिखनी चाहिए थी तेजी; 10 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

Prashant

June 5, 2026

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में हो रही पर कोर्ट ने जताई नराजगी

देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ग्राम पंचायतों में आरक्षण निर्धारण का मामला राज्य सरकार के संज्ञान में पहले से था, इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन कर उसकी सिफारिशों पर तेजी से काम किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रक्रिया अभी भी कछुआ गति से जारी है, जिसे नियमानुसार पूरा होने में करीब छह महीने का समय लग जाएगा।

पंचायतों के लोकतांत्रिक स्वरूप और समयबद्ध चुनाव कराने जैसे गंभीर मुद्दों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग दोनों को पंचायत चुनावों की अब तक की प्रगति रिपोर्ट आगामी 10 जुलाई तक दाखिल करने का कड़ा आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश आशीष कुमार सिंह, ओम प्रकाश प्रजापति एवं खुशीराम द्वारा दायर की गईं विभिन्न जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के उस विवादित शासनादेश (Government Order) को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का ‘प्रशाक’ नियुक्त कर दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्हें प्रशासक बनाकर पद पर बनाए रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-ई (Article 243-E) की मूल भावना और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।

10 जून को प्रस्तावित है मतदाता सूची का प्रकाशन

अदालती कार्रवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट को अवगत कराया कि वर्तमान में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को अपनी तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि चुनाव के लिए मतदाता सूची (Voter List) का अंतिम प्रकाशन आगामी 10 जून को प्रस्तावित है। हालांकि, कोर्ट आरक्षण प्रक्रिया की धीमी रफ्तार से संतुष्ट नजर नहीं आया और उसने सभी संबंधित पक्षों को अगली तारीख पर विस्तृत रिपोर्ट के साथ तलब किया है।

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