स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ
डेयरी क्षेत्र में बदलाव के लिए किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि के लिए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने और किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बीते सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्य में एक संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी के गठन को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक की अध्यक्षता एसटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूर्व आईएएस मनोज कुमार सिंह ने की। इस उच्च स्तरीय सत्र में पशुधन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के., मिशन निदेशक यूपीएसआरएलएम श्रीमती दीपा रंजन सहित विभिन्न दुग्ध उत्पादक कंपनियों और कंसल्टेंसी फर्म डेलॉइट के प्रतिनिधि शामिल हुए।
संकट और संभावनाएं: देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक फिर भी क्षमता से पीछे
बैठक में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश में संगठित दुग्ध प्रसंस्करण का स्तर अभी भी अपनी पूरी क्षमता से काफी दूर है।
उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादक कंपनियों की वर्तमान स्थिति
- सक्रिय कंपनियां: 05
- भौगोलिक विस्तार: 31 जनपद एवं 6,493 ग्राम पंचायतें
- महिला सशक्तिकरण: लगभग 3.81 लाख महिला सदस्य जुड़ी हैं
- कुल टर्नओवर: लगभग 5,277 करोड़ रुपये
मूल्य संवर्धित उत्पादों पर रहेगा मुख्य फोकस
डेलॉइट द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण में रेखांकित किया गया कि केवल तरल दूध बेचने की तुलना में मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों का व्यापार किसानों के लिए कहीं अधिक लाभदायक और संस्थागत स्थिरता देने वाला है। आंकड़ों के अनुसार, जिन निजी कंपनियों के पोर्टफोलियो में मूल्य संवर्धित उत्पाद शामिल हैं, उनका सकल लाभ और (कमाई) उल्लेखनीय रूप से अधिक है। संघीय संरचना के माध्यम से राज्य में प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन (मार्केटिंग) और बाजार विस्तार को प्रभावी ढंग से बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का सीधा और बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
कंपनियों का रुख और सरकार की नीति
बैठक में जहां कई दुग्ध उत्पादक कंपनियों ने संघीय संरचना का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनिवार्य बताया, वहीं कुछ कंपनियों ने वर्तमान व्यवस्थाओं को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने का सुझाव दिया। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने दूध की गुणवत्ता में सुधार, मिलावट पर नियंत्रण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
आगे की राह: स्वैच्छिक जुड़ाव और त्वरित रोडमैप
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसटीसी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी के गठन की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ेगा। यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा:
- इच्छुक दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ इस संघीय संरचना में स्वेच्छा से शामिल हो सकेंगी।
- अन्य कंपनियाँ अपनी वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगी।
सीईओ ने बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देशित किया कि संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी की स्थापना के लिए एक सुदृढ़ रणनीतिक दस्तावेज और विस्तृत कार्यान्वयन रोडमैप तत्काल तैयार किया जाए।

