उन्नाव जिले में गंगा एक्सप्रेसवे पर आसीवन थाना क्षेत्र के कुरसठ गांव के पास सड़क हादसा
उत्तराखंड घूमने जा रहे प्रयागराज के चार दोस्तों की कार एक्सप्रेसवे किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गंगा एक्सप्रेसवे पर आसीवन थाना क्षेत्र के कुरसठ गांव के पास एक रूह कंपा देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। उत्तराखंड घूमने जा रहे प्रयागराज के चार दोस्तों की कार एक्सप्रेसवे पर किनारे खड़े एक खराब ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि 120 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ रही कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कार सवारों की चूक के साथ-साथ एक्सप्रेसवे प्रबंधन (यूपीडा) की भी बड़ी लापरवाहियां और अव्यवस्थाएं उजागर हुई हैं।
झपकी और तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, कार सवार शुक्रवार सुबह प्रयागराज से निकले थे। करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद थकान की वजह से चालक को झपकी आ गई।
- लेन बदलने का नहीं मिला मौका: चश्मदीदों के अनुसार, तीन लेन की सड़क पर ट्रक सबसे किनारे वाली तीसरी लेन में खड़ा था। कार की रफ्तार करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा थी। झपकी आने के कारण चालक को संभलने या ब्रेक लगाने का कुछ सेकेंड का भी समय नहीं मिला।
- फटे एयरबैग भी नहीं बचा सके जान: टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के सेफ्टी एयरबैग खुलने के बाद उनके चीथड़े उड़ गए और कार चालक की सीट तक ट्रक के नीचे घुस गई।
यूपीडा की लापरवाही: आधे घंटे तक नहीं हटा खराब ट्रक
हादसे में यूपीडा की भी घोर लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह ट्रक हादसे से करीब आधा घंटा पहले वहां खराब होकर खड़ा हुआ था। यूपीडा के वे कैमरे जो गलत लेन या वाहन के रुकते ही गश्ती दल को अलर्ट भेजते हैं, वे पूरी तरह चालू नहीं थे। अगर समय रहते अलर्ट मिलता तो ट्रक को वहां से हटाया जा सकता था और यह हादसा टल जाता।
‘नो-कट’ और दूरी के चक्रव्यूह में टूटी सांसें
हादसे के बाद सिस्टम की एक और बड़ी खामी सामने आई, जिसने घायलों की बची-कुची उम्मीदें भी खत्म कर दीं। एक्सप्रेसवे पर पास में कोई ‘इमरजेंसी कट’ न होने के कारण पुलिस और क्रेन को मौके पर पहुंचने में ही करीब 30 मिनट लग गए। कार इस कदर पिचक चुकी थी कि दरवाजों और छत को कटर मशीन से काटने में 40 मिनट और लग गए।
घटनास्थल से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर सफीपुर और मियागंज सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) थे, लेकिन एक्सप्रेसवे पर कट न होने के कारण एम्बुलेंस को घायलों को लेकर 32 किलोमीटर दूर बांगरमऊ सीएचसी और 40 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल भागना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पास के अस्पताल में समय पर इलाज मिल जाता, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

मृतकों की पहचान और गांव में मातम
हादसे का शिकार हुए युवक आपस में दोस्त और कारोबारी थे। विजय पटेल (35 वर्ष): निवासी जाफरपुर (प्रयागराज), टेंट कारोबारी। उदय पटेल (26 वर्ष): विजय के भतीजे, जूता-चप्पल कारोबारी (घर के इकलौते बेटे)। अनुपम गुप्ता (32 वर्ष): मोबाइल दुकानदार (कार यही चला रहे थे)।अमन (28 वर्ष): निवासी मानधाता (प्रतापगढ़), अनुपम की दुकान पर काम करते थे।
मृतकों के पास मिले मोबाइलों के जरिए उनके परिजनों को सूचित किया गया, जिसके बाद कोहराम मच गया। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और खराब ट्रक के चालक को हिरासत में ले लिया है।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए अधिकारियों को मौके पर राहत कार्य तेज करने और पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं।

