10 दिनों का होगा नवरात्र उत्सव; 11 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त में होगी कलश स्थापना
दो दिन रहेगा अष्टमी का विशेष प्रभाव; 19 अक्टूबर को होगी विशेष संधि पूजा
लखनऊ। त्याग, समर्पण और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस बार 10 दिनों का होगा। 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस उत्सव में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर आसीन होकर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार अष्टमी तिथि का प्रभाव दो दिनों तक रहेगा और 20 अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के ज्योर्तिविज्ञान विभाग के प्रो अनिल पोरवाल ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की उपस्थिति रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में सामान्यतः कलश स्थापना वर्जित होती है, इसलिए अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना करना शास्त्र सम्मत और सर्वोत्कृष्ट माना गया है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त नवरात्र के प्रथम दिन, रविवार 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त अभिजित मुहूर्त सुबह 11:22 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु इस समयावधि में कलश स्थापित कर मां भगवती की आराधना शुरू कर सकते हैं।
अष्टमी, नवमी और संधि पूजा का समय अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 05:53 बजे से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर की सुबह 07:53 बजे तक रहेगी, जिससे इसका प्रभाव दो दिनों तक मान्य रहेगा। वहीं, महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को रखा जाएगा।
अष्टमी के समापन और नवमी के आरंभ का संधिकाल विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी समय माता दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर असुर चंड-मुंड का वध किया था। इस बार 19 अक्टूबर (सोमवार) को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक संधि पूजा का विशेष विधान रहेगा। इसके पश्चात 20 अक्टूबर को हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी मनाई जाएगी।
मां दुर्गा की सवारी का क्या है महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन का खास महत्व होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और अच्छी वर्षा से जोड़कर देखा जाता है। वहीं माता का प्रस्थान घोड़े पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में देवी के घोड़े पर प्रस्थान को बदलाव और हलचल से जोड़कर देखा जाता है।

