गंगा नदी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है डॉल्फिन का संरक्षण: विशेषज्ञ
स्कूली बच्चों के लिए”अपनी गंगा डॉल्फिन को जानिए”जागरूकता सत्र और चित्रकला प्रतियोगिता
लखनऊ: राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर सोमवार को कुकरेल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश वन विभाग की लुप्तप्राय प्रजाति परियोजना और वाइल्डलाइफ सर्वाइवल एलायंस (WSA) फाउंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी डॉल्फिन (Platanista gangetica gangetica) के संरक्षण और एक स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को रेखांकित करना था।
भारत में हर साल 5 अक्टूबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के क्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। इस दौरान “Know Your Gangetic Dolphin” विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। सत्र के दौरान विशेषज्ञ डॉ. अरुणिमा सिंह और कनाड ने विद्यार्थियों को डॉल्फिन के जीवविज्ञान, इसके पारिस्थितिकीय महत्व और इसके समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों—जैसे आवास क्षरण, नदी प्रवाह में परिवर्तन, प्रदूषण तथा मछली पकड़ने के जाल में आकस्मिक फंसने जैसी समस्याओं के बारे में विस्तार से समझाया।

विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि मीठे पानी की इस जलीय प्रजाति का संरक्षण वास्तव में संपूर्ण नदी तंत्र और उस पर निर्भर मानव आबादी के बेहतर भविष्य के लिए अनिवार्य है। कार्यक्रम में वन संरक्षक (लुप्तप्राय प्रजाति परियोजना) संजय बिस्वाल (IFS) और वन्यजीव वार्डन के. एन. सुधीर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सत्र के बाद आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से संरक्षण का संदेश दिया, जिसमें माही कश्यप ने प्रथम, जानवी ने द्वितीय, रितिका ने तृतीय और समा बानो ने चतुर्थ स्थान हासिल किया। सुश्री रेनू सिंह के संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम को रेंज अधिकारी विवेक और कपिल सैनी का विशेष सहयोग मिला। आयोजन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि युवाओं को वन्यजीव व नदी संरक्षण से जोड़कर ही दीर्घकालिक और प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।

