लखनऊ में आरएसएस के कार्यकर्ता विकास वर्ग का समापन, सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर और पद्मश्री रामसरन वर्मा का प्रबोधन

Anoop

June 11, 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लखनऊ के सरस्वती कुंज में २० दिवसीय ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम’ का समापन

संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर मुख्य वक्ता और प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा रहे मौजूद

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र द्वारा आयोजित २० दिवसीय ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-प्रथम’ का समापन समारोह बुधवार को निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर और मुख्य अतिथि के रूप में प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा उपस्थित रहे।

वर्ष २०२६ चार ऐतिहासिक वर्षगाँठों का संगम: रामदत्त चक्रधर

समारोह को सम्बोधित करते हुए सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने वर्ष २०२६ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह वर्ष देश की अस्मिता और संस्कृति से जुड़े चार महत्वपूर्ण अवसरों का साक्षी है, जिसमें:

  • स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की १५०वीं जन्म वर्षगांठ,
  • गुरु तेगबहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान की ३५०वीं वर्षगांठ,
  • राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम’ की १५०वीं वर्षगांठ, तथा
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का शताब्दी (१००वाँ) वर्ष शामिल है।

उन्होंने संघ के विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि १९२५ में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपा गया यह बीज आज ८३ हजार से अधिक शाखाओं के एक विशाल वटवृक्ष के रूप में राष्ट्रसेवा में संलग्न है।

राष्ट्र प्रथम की भावना और सामाजिक समरसता पर बल

सह सरकार्यवाह ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संघ का मूल ध्येय चरित्रवान, संगठित और राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण के माध्यम से भारत को वैभवशाली बनाना है। उन्होंने विभाजन काल, चीन युद्ध, आपातकाल और हाल ही में कोरोना संकट के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए सेवा कार्यों और राष्ट्ररक्षा के संकल्पों को रेखांकित किया।

सामाजिक ताने-बाने पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि छुआछूत समाज को कमजोर करती है। संघ ‘एक सह-सम्पत’ और ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ के माध्यम से समाज की सभी जातियों को एकजुट करने और पारिवारिक जीवन-मूल्यों को सुदृढ़ करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा बताते हुए स्वदेशी आचरण अपनाने का आह्वान किया।

राष्ट्र निर्माण यज्ञ में आहुति का प्रकटीकरण है प्रशिक्षण: पद्मश्री रामसरन वर्मा

मुख्य अतिथि और प्रख्यात कृषक पद्मश्री रामसरन वर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह आयोजन मात्र एक प्रशिक्षण वर्ग का समापन नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में स्वयंसेवकों की आहुति का प्रकटीकरण है। उन्होंने प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं से समाज में अलगाव को समाप्त कर एकजुटता लाने और देश, धर्म व संस्कृति की रक्षा के दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की अपेक्षा की।

चार प्रांतों के २८९ स्वयंसेवकों ने लिया प्रशिक्षण

इस २० दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के अवध, कानपुर, काशी और गोरखपुर प्रांतों के विभिन्न जिलों से आए २८९ स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षार्थियों को शारीरिक, बौद्धिक, व्यवस्थापन, सेवा, सम्पर्क और प्रचार जैसे संगठनात्मक विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया गया। वर्ग के अंतर्गत ७ जून को आयोजित ‘कुटुम्ब-सहभोज’ में लगभग २०० परिवारों ने भाग लेकर सामाजिक और पारिवारिक समरसता का संदेश दिया।

प्रशासनिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र की गणमान्य विभूतियाँ रहीं उपस्थित

समापन समारोह में संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य प्रेम कुमार, क्षेत्र संघचालक कृष्ण मोहन, अवध प्रान्त के प्रान्त संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह, क्षेत्र प्रचारक अनिल सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके साथ ही, लखनऊ की प्रशासनिक, शैक्षणिक और राजनीतिक जगत की प्रमुख हस्तियां भी कार्यक्रम की साक्षी बनीं। इनमें पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी, आईएएस अनीता भटनागर जैन, अपर महाधिवक्ता कुलदीप त्रिपाठी, पूर्व सांसद डॉ. अशोक बाजपेई, एमएलसी डॉ. महेन्द्र सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जे.पी. सैनी, बीबीएयू के कुलपति आर.के. मित्तल, डॉ. शकुन्तला विश्वविद्यालय के कुलपति संजय सिंह, भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति अजय तनेजा, एनबीआरआई के निदेशक अजीत शासने, कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एम.एल. भट्ट सहित भारी संख्या में स्वयंसेवक और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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