योगी के ‘टोंटी’ वाले तंज पर अखिलेश का तीखा पलटवार; सीएम को बताया ‘करप्ट माउथ’, अतीत पर उठाए सवाल

Prashant

June 6, 2026

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर जुबानी तीर चलने शुरू

सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘टोंटी’ वाले तंज पर सपा मुखिया अखिलेश का तंज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बिना नाम लिए कसे गए ‘टोंटी’ वाले तंज पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बेहद तीखा पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने न सिर्फ सीएम को ‘करप्ट माउथ’ (दूषित भाषा वाला) करार दिया, बल्कि उनके अतीत, राजनीतिक सफर और गोरखनाथ मठ के उत्तराधिकार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पर्यावरण दिवस पर सीएम योगी का वो तंज, जिससे गरमाई सियासत

दरअसल, विवाद की शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से हुई। मंच से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हर घर नल योजना’ और जल संरक्षण की बात करते हुए बिना किसी का नाम लिए एक सियासी चुटकी ली।

सीएम योगी ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा था कि “हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है, तो कोई टोंटी खुली छोड़ दे रहा है। जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और तस्करों के प्रति सजग रहें।”

इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों और वहां मौजूद लोगों ने तुरंत सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सरकारी बंगले से लगे पुराने ‘टोटी चोरी’ के आरोपों से जोड़कर देखा।

अखिलेश का पलटवार: “यह डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी भाषा है”

मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट साझा किया। उन्होंने विज्ञान और मनोविज्ञान का हवाला देते हुए सीएम योगी की भाषा शैली पर निशाना साधा।

अखिलेश यादव ने लिखा कि “विज्ञान कहता है कि किशोरावस्था में किया गया वनस्पति का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। वहीं मनोविज्ञान कहता है कि बचपन के अनुभव व्यवहार पर गहरी छाप छोड़ते हैं। सीएम के ‘करप्ट माउथ’ होने की वजह शायद यही है।”

इसके आगे सपा प्रमुख ने सीएम योगी के पूर्व आश्रम के नाम (अजय सिंह बिष्ट) का जिक्र करते हुए उनके अतीत पर हमला बोला। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे, तब उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।”

पक्षपाती परिवारवादऔर मठ के उत्तराधिकार पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी और सीएम योगी के पारिवारिक रिश्तों का जिक्र करते हुए ‘परिवारवाद’ का मुद्दा भी उछाल दिया।

अखिलेश ने सवाल उठाते हुए पूछा

  • रिश्तेदारी का प्रभाव: आनंद सिंह बिष्ट (सीएम के पिता) और महंत अवैद्यनाथ जी रिश्ते में भाई थे। ऐसे में अजय सिंह बिष्ट को ही कुछ वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी क्यों चुना गया? क्या यह योग्यता थी या रिश्तेदारी का प्रभाव?
  • चुनाव प्रक्रिया पर सवाल: क्या मठ में महंत चुनने के लिए कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? पहले मठ की गद्दी मिली और फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी मिल गई।
  • योग्यता पर तंज: जो व्यक्ति डग्गामार वाहन चलवा रहा था, वह महज 4 वर्षों में इतना योग्य कैसे हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए?

अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने बेहद कड़ा प्रहार करते हुए लिखा, “पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *