श्रावण मास 2026: सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी का अद्भुत संयोग, भद्रा के बिना मनेगा रक्षाबंधन का पर्व

Prashant

June 5, 2026

दो दशकों बाद आया ऐसा अवसर: सोमवार और नागपंचमी का एकीकरण

रक्षाबंधन: 5 साल बाद भद्रा की बंदिशों से आज़ाद, दिनभर सजेगी भाइयों की कलाई

लखनऊ। वर्ष 2026 का सावन (श्रावण) का महीना शिव भक्तों और सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के लिए अलौकिक और विशेष फलदायी सिद्ध होने वाला है। इस बार की ग्रह-नक्षत्रों की चाल सावन के महीने को बेहद खास बना रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिषविज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनिल पोरवाल के अनुसार, इस बार सावन के चार सोमवारों में से दो सोमवार ऐसे होंगे जो अपने आप में बेहद दुर्लभ और विशिष्ट योग लेकर आ रहे हैं। इस क्रम में साल का सबसे बड़ा और चमत्कारी महासंयोग सावन के तीसरे सोमवार यानी 17 अगस्त 2026 को बनने जा रहा है, क्योंकि इसी दिन नागपंचमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा।

आमतौर पर कैलेंडर में नागपंचमी की तिथि सावन के सोमवार से आगे-पीछे ही आती है, लेकिन इस बार सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं। यह दुर्लभ संयोग पूरे 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद वापस लौट रहा है। इससे पहले ऐसा अनूठा योग वर्ष 2003 में निर्मित हुआ था।

‘छत्र भंग’ योग से राजनीतिक गलियारों में हलचल की आहट

आगामी 17 अगस्त को नागपंचमी के साथ-साथ ‘सिंह संक्रांति’ भी है। इस दिन सूर्य देव अपनी चाल बदलते हुए कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वयं की राशि ‘सिंह’ में गोचर करेंगे। ज्योतिषीय संहिताओं के अनुसार, श्रावण मास में सोमवार के दिन सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश करना छत्र भंग’ नामक शक्तिशाली योग को जन्म देता है। प्राचीन ज्योतिष शास्त्र में इस योग को सत्ता के समीकरणों में बड़े बदलावों और राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत माना जाता है।

हालांकि, प्रो. पोरवाल ने इसका एक दूसरा और सुखद पहलू भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि चूंकि सोमवार का स्वामी चंद्रमा है—जो शीतलता, मन और संतोष का कारक माना जाता है—इसलिए इस अद्भुत ग्रह-योग के प्रभाव से देश की आम जनता के जीवन में मानसिक शांति, आपसी भाईचारा, स्थिरता और सामाजिक तालमेल मजबूत होगा।

रक्षाबंधन: 5 साल बाद भद्रा की बंदिशों से आज़ाद, दिनभर सजेगी भाइयों की कलाई

इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार (28 अगस्त) बहनों के लिए बहुत ही सुगम और खुशियाँ लेकर आने वाला है। इस बार भाई-बहन के स्नेह के इस पर्व पर भद्रा (अशुभ समय) की कोई बाधा या साया नहीं रहेगा। भद्रा मुक्त रक्षाबंधन का ऐसा सुखद संयोग पूरे 5 साल बाद बन रहा है, क्योंकि इससे पहले वर्ष 2021 में बिना भद्रा के यह पर्व मनाया गया था। किसी भी प्रकार का व्यवधान न होने से बहनें इस बार पूरे दिन अपनी सुविधा के अनुसार भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकेंगी।

शास्त्र सम्मत राखी का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

धार्मिक नियमों और उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर इस बार सावन पूर्णिमा की तिथि और राखी बांधने का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:

  • श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से
  • श्रावण पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे पर

चूंकि 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सुबह जल्दी ही समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार रक्षासूत्र बांधने का सबसे फलदायी, मुख्य और महामुहूर्त सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक (कुल समय: 3 घंटे 51 मिनट) का रहेगा। विद्वानों का मानना है कि इस शुभ बेला में किया गया रक्षाबंधन भाई और बहन दोनों के जीवन में अपार सुख, समृद्धि और दीर्घायु लेकर आएगा।

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