यूपी में चकबंदी प्रक्रियाओं को रफ्तार देने की तैयारी: 1 वर्ष में पूरे होंगे काम, अवैध कब्जों से जुड़े 7,955 मुकदमों के तुरंत निपटारे के निर्देश

Anoop

June 3, 2026

सरकार ने राज्य में वर्षों से लटकी चकबंदी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने

और ग्राम सभा की जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए कड़ा रुख अपनाया

लखनऊउत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सालों से लटकी चकबंदी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने और ग्राम सभा की जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश के चकबन्दी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वर्षों से लंबित चकबंदी के कामों को हर हाल में एक वर्ष के भीतर पूरा कर प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।

चकबंदी आयुक्त ने बताया कि राज्य के 38 जिलों के 71 चकबंदी गांवों से जुड़े कुल 7,955 मुकदमे (राजस्व वाद) तहसील स्तर के विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। ये सभी मामले उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत पंजीकृत हैं, जो सार्वजनिक और ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जे से संबंधित हैं। इन मुकदमों के लंबित होने की वजह से चकबंदी के काम में काफी देरी हो रही है।

अवैध कब्जेदारों की वजह से प्रभावित हो रहे किसान

समीक्षा बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि प्रारंभिक चकबंदी योजना की अधिसूचना (धारा-4) जारी होने से पहले ही कई अराजक तत्वों द्वारा ग्राम सभा की जमीनों पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण कर लिए जाते हैं। जब चकबंदी की प्रक्रिया शुरू होती है, तो बेदखल होने के डर से ये अतिक्रमणकारी इस पूरी प्रक्रिया का विरोध करते हैं। इससे न सिर्फ सरकारी काम बाधित होता है, बल्कि आम किसानों के हित भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

जिलाधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के सख्त निर्देश

चकबंदी आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) को आदेश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने-अपने जिलों की तहसीलों में चल रही चकबंदी प्रक्रियाओं की खुद समीक्षा करें। उन्होंने निर्देश दिया कि धारा-67 के तहत दर्ज इन 7,955 विचाराधीन मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर, तय समय सीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से निपटाया जाए। इसके लिए अधिकारियों को प्रभावी निगरानी और सुपरविजन करने को कहा गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इन राजस्व मुकदमों का तेजी से निपटारा होने से ग्राम समाज और सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा सकेगा। इसके साथ ही, जमीनी विवाद खत्म होने से राज्य में चकबंदी की प्रक्रिया को एक नई रफ्तार मिलेगी और किसानों को उनका हक समय पर मिल सकेगा।

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