लखनऊ पुलिस और FRRO की संयुक्त टीम ने विभूतिखंड स्थित मैक्स अस्पताल के पास से एक साल से फरार उज़्बेकिस्तान निवासी लोला कायूमोवा को गिरफ्तार किया
आरोप है कि लोला विदेशी युवतियों को अवैध रूप से भारत लाकर ठहराती थी और उसने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपनी पहचान छिपा रखी थी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस और फॉरनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की संयुक्त टीम ने पिछले एक साल से फरार चल रही उज़्बेकिस्तान की नागरिक लोला कायूमोवा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे विभूतिखंड स्थित मैक्स अस्पताल के पास से हिरासत में लिया। लोला पर विदेशी युवतियों को अवैध रूप से भारत लाकर ठहराने, अवैध धंधा संचालित करने और प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपनी पहचान छिपाकर रहने का गंभीर आरोप है।
छापेमारी के दौरान चकमा देकर हुई थी फरार
मामले की शुरुआत 20 जून 2025 को हुई थी, जब सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस को एक फ्लैट में उज़्बेकिस्तान की दो युवतियों के अवैध रूप से ठहरे होने की सूचना मिली थी। पुलिस और एफआरआरओ की टीम ने जब मौके पर छापा मारा, तो वहां से नीलोफर और होलिड़ा नाम की दो उज़्बेक युवतियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया था कि इन दोनों युवतियों को लोला ही अवैध रूप से लेकर आई थी और उन्हें वहां ठहराया था। छापेमारी के वक्त लोला भी उसी फ्लैट में मौजूद थी, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रही थी। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।
प्लास्टिक सर्जरी से पहचान छिपाने की जांच
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि लोला के परिचित एक स्थानीय डॉक्टर (विवेक गुप्ता) ने इन विदेशी युवतियों की प्लास्टिक सर्जरी की थी। अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पहलू की जांच कर रही हैं कि क्या लोला ने भी फरार रहने के दौरान पुलिस से बचने के लिए अपनी चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कराकर पहचान बदल ली थी।
पासपोर्ट-वीज़ा सालों पहले हो चुका था खत्म
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि लोला का पासपोर्ट और वीज़ा कई साल पहले ही एक्सपायर हो चुका था। इसके बावजूद वह अवैध रूप से लखनऊ और देश के अन्य बड़े शहरों में पहचान बदलकर छिपकर रह रही थी और विदेशी युवतियों के जरिए नेटवर्क चला रही थी। उसके पास से कई संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
आगे की कार्रवाई:
एडीसीपी दक्षिणी आर वसंथ कुमार के अनुसार, लोला को हिरासत में लेकर खुफिया एजेंसियों (IB/LIU) और एफआरआरओ द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है। उसके नेटवर्क और दस्तावेजों की पूरी तफ्तीश के बाद उसे उज़्बेकिस्तान डिपोर्ट (वापस भेजने) की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

