भर्ती घोटालों और बेरोजगारी के खिलाफ आइसा का हल्ला बोल: यूपी प्रेस क्लब में जनसभा, देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

Anoop

August 3, 2026

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने रविवार को राजधानी लखनऊ यूपी प्रेस क्लब में एक प्रांतीय जनसभा

‘पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर का ऐतिहासिक आंदोलन और उसके विस्तार का रास्ता’ विषय पर आयोजित

लखनऊ। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने रविवार को राजधानी लखनऊ स्थित यूपी प्रेस क्लब में एक प्रांतीय जनसभा का आयोजन किया। ‘पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर का ऐतिहासिक आंदोलन और उसके विस्तार का रास्ता’ विषय पर आयोजित इस सभा में भर्ती घोटालों, परीक्षा धांधली और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का शंखनाद किया गया। जनसभा में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों, प्राध्यापकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और त्वरित पारदर्शी नियुक्तियों की मांग उठाई।

23 दिनों की भूख हड़ताल से सुलगी आंदोलन की चिंगारी: मनीष कुमार

आइसा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक चली भूख हड़ताल महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और आत्मसम्मान की लड़ाई थी।

“सरकार ने छात्र आंदोलन को दबाने और नजरअंदाज करने का पूरा प्रयास किया, लेकिन आम नागरिकों और युवाओं के अभूतपूर्व समर्थन ने इसे एक जनांदोलन बना दिया। अब इस संघर्ष को प्रदेश के कोने-कोने—हर विश्वविद्यालय, कस्बे और गांव तक पहुंचाया जाएगा।”

— मनीष कुमार, प्रदेश अध्यक्ष (आइसा)

इसके साथ ही आइसा ने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को एक बार फिर दोहराया।

शिक्षा के बाजारीकरण और जवाबदेही पर घेरा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और आइसा के संस्थापक अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह ने कहा कि छात्र आंदोलन की सार्थकता तभी है, जब वह अपनी समस्याओं को शिक्षा के अधिकार, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे व्यापक मुद्दों से जोड़े। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन ने पेपर लीक के मुद्दे को सीधे तौर पर बेरोजगारी, शिक्षा के बाजारीकरण और संस्थागत जवाबदेही से जोड़कर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

डिजिटल माध्यम और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति बनी आंदोलन की ताकत

लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. डॉ. माद्री काकोटी ने आंदोलन के तरीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संघर्ष ने युवाओं के विरोध की एक नई राजनीतिक और सांस्कृतिक भाषा गढ़ने का काम किया है।

  • पारंपरिक मीडिया की चुप्पी को चुनौती: सोशल मीडिया, लाइव स्ट्रीमिंग, मीम्स, लघु वीडियो, नुक्कड़ नाटक और गीतों के जरिए आंदोलन की बात देश के अंतिम छात्र तक पहुंची।
  • रचनात्मक विरोध: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर पारंपरिक मीडिया द्वारा बनाई गई खामोशी को तोड़ा गया।

स्थानीय छात्र नेताओं के संघर्ष को समर्थन

जनसभा के अंत में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में 56 दिनों तक चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र नेताओं—प्रिंस प्रकाश, प्रेम प्रकाश और हर्षित शुक्ला के संघर्ष की सराहना की गई तथा उनके प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की गई। सभा ने एक स्वर में संकल्प लिया कि परीक्षा धांधली और युवाओं के हक की इस लड़ाई को और अधिक धार दी जाएगी।

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