डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ का 13वाँ दीक्षांत समारोह
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष आनंदीबेन पटेल के प्रतिनिधि रहे शामिल
लखनऊ। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ का 13वाँ दीक्षांत समारोह शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से आयोजित यह समारोह राज्यपाल जी के प्रतिनिधि एवं विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस अवसर पर तकनीकी पारदर्शिता और आधुनिकता को बढ़ावा देते हुए सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों की उपाधियाँ डिजीलॉकर पर अपलोड की गईं।
सामाजिक सरोकार: 300 आँगनबाड़ी किट एवं 300 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। राज्यपाल जी की प्रेरणा से जनपद बदायूँ के लिए 300 आँगनबाड़ी किटों का वितरण किया गया और 300 बालिकाओं को निःशुल्क एचपीवी (HPV) टीकाकरण से लाभान्वित किया गया। टीकाकरण को प्रोत्साहन देने हेतु जिला कार्यक्रम अधिकारी को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अब तक 5.87 लाख से अधिक एचपीवी टीकाकरण डोज दी जा चुकी हैं तथा लगभग 70,793 आँगनबाड़ी केंद्रों को संसाधन-संपन्न बनाया जा चुका है।
दिव्यांग मेधावियों का शानदार प्रदर्शन समारोह में डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने माननीय राज्यपाल जी का संदेश पढ़ा। राज्यपाल जी ने पदक व उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन और संकल्प का परिणाम है। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि कुल 156 पदकों में से 45 पदक दिव्यांग विद्यार्थियों ने हासिल किए हैं। यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा और सफलता किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। उन्होंने विश्वविद्यालय को समावेशी शिक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहाँ दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थी एक साथ अध्ययन करते हैं।

पर्यावरण संरक्षण और अभिनव पहलें राज्यपाल जी ने अपने संदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए प्रत्येक विद्यार्थी से कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसका संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों जैसे—भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ घोषित किया जाना, अडानी समूह व इन्फोसिस फाउंडेशन के साथ समझौते, ‘सुगंध पथ’ योजना, स्मार्ट विजन चश्मे, ब्रेल पुस्तकालय, और पूर्व सैनिकों को निःशुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने जैसी अभिनव पहलों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

