‘डीएम साहब! मैं जिंदा हूँ, कागजों में मुझे मार दिया गया’; मोहनलालगंज समाधान दिवस में किसान की गुहार पर जिलाधिकारी हैरान

Prashant

June 6, 2026

मामला बाबूखेड़ा (मजरा रघुनाथखेड़ा) के रहने वाले किसान काशी प्रसाद का है

‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान एक किसान ने जिलाधिकारी के सामने किया बयां

लखनऊ“डीएम साहब! मैं तो पूरी तरह जिंदा हूँ और आपके सामने खड़ा हूँ। लेकिन तहसील के कर्मचारियों ने कागजों में मुझे मृत घोषित कर दिया और मेरी जमीन दूसरों के नाम कर दी। कृपया मुझे न्याय दिलाइए और मेरी जमीन वापस कराइए।” यह दर्दनाक दास्तान शनिवार को मोहनलालगंज तहसील में आयोजित ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान एक किसान ने जिलाधिकारी के सामने बयां की, जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी सन्न रह गए।

खतौनी देखकर उड़े होश, लेखपाल पर मिलीभगत का आरोप

यह मामला बाबूखेड़ा (मजरा रघुनाथखेड़ा) के रहने वाले किसान काशी प्रसाद का है। जिलाधिकारी के सामने पेश होकर उन्होंने राजस्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही और कथित फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया। किसान काशी प्रसाद ने बताया कि जब उन्होंने अपनी जमीन की खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) निकलवाई, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत (मरा हुआ) दिखा दिया गया था। उनकी कृषि भूमि को उनके जीवित रहते हुए ही दूसरे लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया गया था। पीड़ित किसान का आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे क्षेत्रीय लेखपाल और तहसील के राजस्व कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही या फिर भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत है।

दोबारा नाम दर्ज करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

पीड़ित किसान ने संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र सौंपकर प्रशासन से मांग की है कि उनकी जमीन पर फर्जी तरीके से दर्ज किए गए अन्य लोगों के नामों को तुरंत खारिज किया जाए। साथ ही उन्हें दोबारा सरकारी कागजों में जीवित और वैध काश्तकार (जमीन का मालिक) के रूप में दर्ज किया जाए। उन्होंने इस साजिश में शामिल कर्मचारियों और इसका फायदा उठाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

जिलाधिकारी ने दिए तुरंत जांच के आदेश

इस अजब-गजब और गंभीर मामले को सुनते ही जिलाधिकारी विशाख जी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर ही तहसीलदार को इस पूरे प्रकरण की तत्काल गहन जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी का कड़ा रुख: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि तहसील के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई गई, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ बेहद कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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