ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी और विधानसभा चुनावों के चलते यूपी में पंचायत चुनाव अब जून-जुलाई से पहले होना संभव नहीं है
वर्तमान ग्राम प्रधानों को नवंबर के बाद प्रशासक के तौर पर छह महीने का एक और कार्यकाल मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ही संभव हो सकेंगे। ऐसे में राज्य के ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में 6 महीने का एक और कार्यकाल मिलने की मजबूत संभावना बन रही है।
समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए सभी 75 जिलों का सर्वे करना है। आयोग की टीम 17 अगस्त तक केवल 22 जिलों का भ्रमण कर सकी है और पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने में नवंबर-दिसंबर तक का समय लग जाएगा।
आयोग की सिफारिशें आने तक राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। दिसंबर के बाद चुनाव आचार संहिता लागू होने और अप्रैल-मई तक चुनावी प्रक्रिया चलने के कारण स्थानीय निकाय चुनाव जून-जुलाई से पहले आयोजित कराना संभव नहीं होगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मूल रूप से अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थे, लेकिन कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते समय पर नहीं हो सके। 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायती राज विभाग ने प्रधानों को ही 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया था। यह अंतरिम अवधि नवंबर में पूरी हो रही है, जिसे अब आगे बढ़ाए जाने की पूरी तैयारी है।

