गिद्ध नहीं रहे तो फैलेंगी रेबीज और एंथ्रेक्स जैसी महामारी, लखनऊ प्राणी उद्यान में उठी संरक्षण की गुहार
प्रकृति के सबसे बड़े ‘सफाईकर्मी’ गिद्धों का अस्तित्व खतरे में, घटती संख्या से बीमारियों के प्रसार का बढ़ा खतरा
लखनऊ। नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान स्थित सारस प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस एवं शिक्षक दिवस के अवसर पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी व उद्यमी सुनैना चौधरी रहीं। इस दौरान प्राणि उद्यान के निदेशक संजय कुमार बिस्वाल, उप निदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, क्षेत्रीय वनाधिकारी मुकेश चंद्र कांडपाल सहित अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न विद्यालयों के 100 से अधिक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
समारोह की शुरुआत में मुख्य अतिथि ने गिद्ध जागरूकता दिवस पर बच्चों द्वारा बनाए गए पोस्टर्स का अवलोकन किया। इसके बाद निदेशक संजय कुमार बिस्वाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि बीते 30 वर्षों में डाइक्लोफेनाक जैसी दवाओं के कारण गिद्धों की आबादी 50% से अधिक घट चुकी है। प्रकृति के ये सफाईकर्मी पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
मुख्य अतिथि सुनैना चौधरी ने बच्चों को घर जाकर परिजनों के साथ गिद्ध संरक्षण पर चर्चा करने और उनके योगदान को समझने के लिए प्रेरित किया। साथ ही शिक्षक दिवस के अवसर पर माता-पिता और शिक्षकों को जीवन का पहला गुरु बताते हुए उनके मार्गदर्शन पर चलने का संदेश दिया।
समारोह में प्राणी उद्यान के बायोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत त्रिपाठी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर प्रखर कृष्णा ने प्रस्तुति देते हुए रामायण कालीन जटायु और संपाती के योगदान को याद दिलाया। उन्होंने बताया कि भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की 9 प्रजातियां सबसे प्रभावी ‘स्कैवेंजर्स’ (सफाईकर्मी) हैं।

गिद्ध मवेशियों के शवों को साफ कर रेबीज और एंथ्रेक्स जैसी बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं, इसलिए उनका संरक्षण बेहद आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उप निदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने सभी आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

