संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय ललित कला अकादेमी, नई दिल्ली का
72वां स्थापना दिवस 5 अगस्त को क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ में भव्यता से मनाया गया
लखनऊ। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय ललित कला अकादेमी, नई दिल्ली का 72वां स्थापना दिवस 5 अगस्त को अलीगंज स्थित क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ प्रांगण में भव्यता एवं गरिमा के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘राग एवं रंग’ में उपशास्त्रीय गायन की ऐसी रसधार बही कि उपस्थित कला मर्मज्ञ और श्रोता भाव-विभोर होकर झूम उठे।
समारोह का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं वरिष्ठ कलाकारों—प्रो. उमेश सक्सेना, संगीत नाटक अकादमी लखनऊ के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, संदीप भाटिया, डॉ. उमेन्द्र प्रताप सिंह, किरण सिंह राठौर तथा अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित व्याख्यान सत्र में भारतीय समकालीन कला, चित्रकला, मूर्तिकला और ग्राफिक्स को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में अकादेमी की भूमिका पर गहन मंथन हुआ।
इस दौरान केन्द्र के विकास और कला-साधना में अभूतपूर्व योगदान देने वाले प्रतिष्ठित कलाकारों—प्रो. सुनील सक्सेना, प्रो. उमेश सक्सेना, डॉ. उमेन्द्र प्रताप सिंह एवं संदीप भाटिया को अंगवस्त्र तथा पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही, वर्तमान में अकादेमी की कार्यशालाओं में निरंतर सृजनरत वरिष्ठ साधकों—किरण सिंह राठौर, अजीत सिंह, ममता राभा, पूनम नागू तथा पूनम नाग चतुर्वेदी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेन्द्र त्रिपाठी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कलाकारों की निष्ठा और सृजनशीलता को इस केंद्र की वास्तविक शक्ति बताया।

सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण सुरमयी प्रस्तुतियां रहीं। मंच पर जैसे ही उपशास्त्रीय गायन का प्रवाह शुरू हुआ, सुरीले आलाप, तानों की हरकत और भावपूर्ण बंदिशों ने पूरे सभागार को सम्मोहित कर दिया। सुरों की इस निपुण साधना और अप्रतिम गायन शैली ने संगीत प्रेमियों को अंत तक बांधे रखा और दर्शक दीर्घा में बैठा हर कला प्रेमी सुर-ताल की इस जुगलबंदी पर झूमने को मजबूर हो गया। इसके बाद लखनऊ के प्रतिभावान युवा बांसुरी वादक अथर्व प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत मधुर स्वर लहरी ने वातावरण में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार कर दिया।
समारोह के समापन पर अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव द्वारा कला संवर्धन, युवा प्रतिभाओं के मार्गदर्शन और कलात्मक संवाद को निरंतर समृद्ध करने का संकल्प दोहराया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक, छात्र, शोधार्थी और वरिष्ठ कला प्रेमी उपस्थित रहे।

