श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला गहराया
अयोध्या के प्रमुख संतों और वरिष्ठ नेताओं ने निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग उठाई
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील विषय पर अयोध्या के प्रमुख संतों सहित राम मंदिर आंदोलन के वरिष्ठ नेताओं ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई है, जिससे प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
करोड़ों भक्तों की आस्था का सम्मान सर्वोपरि: विनय कटियार
बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे विनय कटियार ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय पर लग रहे आरोपों की सत्यता सामने आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उनके पास किसी प्रकार की निश्चित जानकारी या पुष्टि नहीं है, परंतु यदि इस स्तर पर आरोप लग रहे हैं, तो उनकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी आवश्यक है।
प्राचीन पीठों और संतों ने उठाई पारदर्शिता की मांग
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के शिष्य महंत कमल नयन दास ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों के तहत सत्य की जीत अनिवार्य है। उन्होंने वर्तमान जांच प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी तरह निष्पक्ष जांच की पैरवी की।
इसी क्रम में, दाँतधावन कुंड आचारी मंदिर के महंत विवेक आचारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि करोड़ों भक्तों के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए ट्रस्ट को पूरी सच्चाई जनता के समक्ष रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा से ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा प्रकरण, समीक्षा बैठकें तेज
यह प्रशासनिक विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। भाजपा नेता रजनीश सिंह द्वारा इस वित्तीय विसंगति के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को एक औपचारिक शिकायती पत्र भेजे जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
इसी पृष्ठभूमि में, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र की अयोध्या की हालिया यात्रा और वहां आयोजित उच्च स्तरीय बंद कमरा बैठकों को इसी प्रशासनिक समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे व्यवस्थागत विवाद पर आधिकारिक रुख स्पष्ट किया जा सकता है।

