उप्र बिजली विभाग में प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल, ऊर्जा मंत्री ने यूपीपीसीएल चेयरमैन को लिखा पत्र

Anoop

June 11, 2026

चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर कई नीतिगत निर्णयों पर गहरी नाराजगी जताई

विभागीय समन्वय और कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर खींचतान की स्थिति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में विभागीय समन्वय और कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर खींचतान की स्थिति सामने आई है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर कई नीतिगत निर्णयों पर गहरी नाराजगी जताई है और इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।

बिना अनुमति ईंधन अधिभार लागू करने पर आपत्ति

ऊर्जा मंत्री ने पत्र में स्पष्ट किया है कि जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत एफपीपीएएस (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) लागू करने का संवेदनशील निर्णय उनकी जानकारी और अनुमति के बिना लिया गया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सीधे प्रभावित करने वाले ऐसे फैसलों से आम जनता में गलत संदेश गया है और इससे सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय में सरकार और विभागीय नेतृत्व को विश्वास में लिया जाना अनिवार्य है।

समन्वय की कमी और मीडिया से सूचना मिलने पर नाराजगी

विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पत्र में कहा गया है कि विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों और निर्णयों की जानकारी सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के माध्यम से मिलने के बजाय मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से प्राप्त हो रही है। मंत्री ने इसे एक गंभीर प्रशासनिक विसंगति बताते हुए यूपीपीसीएल मुख्यालय में चेयरमैन की नियमित उपस्थिति और विभागीय समन्वय के स्तर पर असंतोष व्यक्त किया है।

संविदा कर्मियों की छंटनी और अधिकारियों के स्थानांतरण पर रिपोर्ट तलब

पत्र में विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए संविदा कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिकायतों का हवाला देते हुए मंत्री ने पूछा है कि कुछ संविदा कर्मियों को हटाए जाने के पीछे क्या आधार था और यह कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई। इसके साथ ही, अनुभवी अधिकारियों को हटाए जाने के मामलों पर भी नाराजगी जताते हुए इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

ऊर्जा मंत्री के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और माना जा रहा है कि इस विवाद के बाद आने वाले दिनों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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