कानपुर यशोदानगर के प्रकाश चंद्र गुप्ता ‘डेटा एक्सपर्ट इंस्टीट्यूट’ चलाते थे
31 मई की रात से अचानक लापता हुए, 1 जून की सुबह उनके ही दफ्तर में मिली लाश
कानपुर | छोटे पर्दे के मशहूर शो ‘क्राइम पेट्रोल’ को देखकर कोई कानून की नजरों से बचने की खौफनाक स्क्रिप्ट कैसे लिखता है, इसका एक जीता-जागता और सनसनीखेज उदाहरण कानपुर में देखने को मिला है। नवाबगंज इलाके में हुए हाई-प्रोफाइल कंप्यूटर सेंटर संचालक हत्याकांड का पुलिस ने ऐसा पर्दाफाश किया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। कत्ल की इस वारदात को अंजाम देने वाली कोई शातिर महिला नहीं, बल्कि मृतक का ही 15 साल पुराना जिगरी दोस्त निकला, जो बुर्के के पीछे अपना चेहरा छुपाकर मौत का तांडव रचने आया था।
गूगल लोकेशन, मूक-बधिर बनने का नाटक, हाथ में लिखी पर्चियां और सट्टेबाजी का दलदल… इस मर्डर मिस्ट्री की इनसाइड स्टोरी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।
खजुराहो ट्रिप पर बुना गया मौत का ताना-बाना
यशोदानगर के रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता (47) आजाद नगर में ‘डेटा एक्सपर्ट इंस्टीट्यूट’ चलाते थे। बीते 31 मई की रात से वह अचानक लापता हो गए और 1 जून की सुबह उनके ही दफ्तर में उनकी संदिग्ध लाश मिली। आंख के ऊपर चोट का निशान था और मुंह से झाग निकल रहा था। गले की मोटी सोने की चेन और हाथ का भारी ब्रेसलेट गायब था।
पुलिस तफ्तीश में जो सच सामने आया, उसकी बुनियाद इस साल होली पर रखी गई थी। प्रकाश चंद्र अपने दोस्त मोहित द्विवेदी (बीए, एलएलबी पास) के साथ खजुराहो घूमने गए थे। वहां बातों-बातों में प्रकाश ने बता दिया कि उनकी चेन और ब्रेसलेट की कीमत 10 लाख रुपये है। सट्टेबाजी की लत में डूबे और कर्ज के बोझ तले दबे वकील दोस्त मोहित की नजरें वहीं से अपने दोस्त के जेवरात पर टिक गईं।
‘परफेक्ट मर्डर’ की वो स्क्रिप्ट, जो सीसीटीवी ने फेल कर दी
मोहित ने पुलिस को चकमा देने के लिए वेब सीरीज और टीवी शो देखकर एक तगड़ा प्लान बनाया था, लेकिन कानून के लंबे हाथों ने उसकी हर चाल को नाकाम कर दिया:
- अस्पताल में बदला भेष: मोहित अपनी कार से जेके कैंसर संस्थान पहुंचा। वहां उसने कार खड़ी की और बुर्का पहनकर बाहर निकला, ताकि पुलिस को लगे कि कोई महिला मरीज से मिलने आई थी।
- गूंगे होने का नाटक और पर्चियां: पकड़े जाने के डर से उसने रास्ते भर अपनी आवाज किसी को नहीं सुनाई। उसने पहले से ही कागज पर कई पर्चियां लिख रखी थीं। अनवरगंज स्टेशन से उसने ऑटो किया और बिना कुछ बोले ऑटो चालक को गूगल लोकेशन दिखाकर सीधे प्रकाश चंद्र के सेंटर तक पहुंच गया।
‘एडमिशन’ की पर्ची दी और टूट पड़ी मौत!
शाम करीब 7:30 बजे बुर्का पहने मोहित कंप्यूटर सेंटर के केबिन में दाखिल हुआ। उसने प्रकाश चंद्र को एडमिशन के नाम पर एक पर्ची थमाई। प्रकाश जैसे ही पर्ची पढ़ने के लिए घूमे, मोहित ने पीछे से उनकी 10 लाख की चेन और ब्रेसलेट पर झपट्टा मार दिया। केबिन के भीतर दोनों के बीच जिंदगी और मौत की जंग शुरू हो गई। दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई। इसी कशमकश के बीच प्रकाश चंद्र जमीन पर गिर पड़े और उनकी सांसें टूट गईं। शातिर मोहित लाश को घसीटकर दूसरे कमरे में ले गया, जेवरात लूटे और बाहर से कुंडी चढ़ाकर गायब हो गया।
एक छोटी सी भूल और ‘बुर्का मैन’ बेनकाब
मोहित ने खुद को बचाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया था, लेकिन वह केबिन के अंदर अपना वो ‘स्टोल’ (स्कार्फ) भूल गया जिसे उसने बुर्के के ऊपर ओढ़ रखा था। पुलिस ने जब ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो बुर्के वाली महिला की चाल-ढाल पुरुषों जैसी लगी। शक गहराया और कड़ियों को जोड़ा गया तो वही स्टोल मोहित के गले के चारों तरफ लिपटा मिला। पुलिस ने उसे धर दबोचा और उसके पास से 10 लाख के जेवरात और बुर्का बरामद कर लिया।
पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: आखिर कैसे हुई मौत?
इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस ने आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। लेकिन कानपुर पुलिस के दावों के बीच एक बड़ा पेंच फंस गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रकाश चंद्र की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
पुलिस का कहना है कि हाथापाई के दौरान दम टूटने से मौत हुई, लेकिन असल सच अब ‘हिस्टोपैथोलॉजिकल’ जांच (विसरा रिपोर्ट) आने के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, कानून की पढ़ाई कर चुके एक दोस्त ने चंद रुपयों की खातिर 15 साल पुरानी दोस्ती का जो कत्ल किया है, उसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है।

