साहित्य, संस्कृति और कला का दिखेगा अनूठा संगम, रवीन्द्रालय में सजेगा लफ्जों का बाजारइंट्री फ्री और 10 प्रतिशत छूट के साथ पाठकों का स्वागत, 13 मार्च से कहानियों का आगाज
लखनऊ। अदब और तहजीब के शहर लखनऊ की हवाओं में अब किताबों की खुशबू घुलने वाली है। चारबाग स्थित रवीन्द्रालय के मुख्य लॉन में आगामी 13 मार्च से 10 दिन का ‘लखनऊ पुस्तक मेले’ का भव्य आगाज होने वाला है। इस बार मेले की थीम ‘विकसित भारत-विकसित प्रदेश’ (विजन 2047) रखी गई है, जो नई पीढ़ी में राष्ट्र निर्माण और पठन-पाठन के प्रति एक नया जोश भरेगी।
आयोजक मनोज सिंह चंदेल के अनुसार, यह मेला केवल किताबों का बाजार नहीं, बल्कि कला और संस्कृति का उत्सव होगा। उन्होंने बताया कि 22 मार्च तक चलने वाले इस मेले में पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा, कवि सम्मेलन, मुशायरा और कहानी वाचन के अनगिनत सत्र होंगे।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर युवा कलाकार 15 फीट लंबे कैनवस पर अपनी तूलिका से राष्ट्रभक्ति के रंग उकेरेंगे। पारंपरिक किताबों के साथ-साथ यहाँ डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रकाशन और आधुनिक शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध होगी।
प्रमुख प्रकाशक और आकर्षक छूट
वाटरप्रूफ पंडालों में सजे लगभग 60 स्टालों पर नेशनल बुक ट्रस्ट, राजकमल, वाणी, पेंगुइन और हार्पर कॉलिन्स जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशकों की बेस्ट-सेलर किताबें मिलेंगी। पाठकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि मेले में प्रवेश निःशुल्क है और हर किताब पर न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
स्वाद और संवाद का तड़का
मेला निदेशक आकर्ष चंदेल और ज्योति किरन रतन ने बताया कि किताबों के साथ-साथ यहाँ ‘अवधी व्यंजन उत्सव’ का स्वाद भी चखने को मिलेगा। बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि वे स्क्रीन की दुनिया से निकलकर पन्नों की दुनिया से जुड़ सकें। प्रतिदिन सुबह 11 से रात 9 बजे तक।

