लखनऊ में सजी कवियों की महफिल: ‘नवाब शाहाबादी फाउंडेशन’ के पहले कार्यक्रम में जमकर बजीं तालियां

Anoop

June 1, 2026

‘नवाब शाहाबादी फाउंडेशन’ का पहला बड़ा कार्यक्रम रविवार को हुआ

कृष्णा नगर के फैमिलिया होटल में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया

लखनऊ। समाज और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए बनी ‘नवाब शाहाबादी फाउंडेशन’ का पहला बड़ा कार्यक्रम रविवार को कृष्णा नगर के फैमिलिया होटल में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। इस कार्यक्रम में शहर के कई जाने-माने लेखक, कवि, शायर और सामाजिक कार्यकर्ता इकट्ठा हुए। यह पूरा आयोजन स्वर्गीय डॉ. नवाब शाहाबादी की याद में रखा गया था, जहां लोगों ने उनके समाज सेवा के कामों को याद किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर कवि डॉ. संजय मिश्रा ‘शौक़’ ने की और मुख्य अतिथि के रूप में जाने-माने व्यंग्यकार अनूप मणि त्रिपाठी मौजूद रहे।

अमरनाथ ललितको मिला विशेष सम्मान

इस खास मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार अमरनाथ ‘ललित’ को उनके बेहतरीन लेखन के लिए नवाब शाहाबादी साहित्य सम्मान” दिया गया। सम्मान पाने के बाद उन्होंने अपनी खूबसूरत पंक्तियां सुनाईं। “जब दर्द कहीं पर ठहर गया, तब गाए हमसे गीत गए।”

कवि सम्मेलन में शायरों और कवियों ने बांधा समां

इसके बाद हुए कवि सम्मेलन में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां हुईं, जिन्होंने हॉल में बैठे लोगों का दिल जीत लिया। अनुज पाण्डेय ‘अब्र’: मशहूर शायर ने जब अपनी गजल “मुझे मिलती भी कैसे बताओ कामयाबी, ज़रा सा झूठ बोलूँ तो लहजा काँपता है” पढ़ी, तो सब झूम उठे।

आदर्श सिंह ‘निखिल’: युवा गीतकार ने आज के युवाओं में जोश भरते हुए सुनाया कि “सोचा है तो फिर सोच को आकार दीजिए, पाले हैं वहम मन में कोई मार दीजिए। तलवार से बस जंग नहीं जीत पाएंगे, यूँ कीजिए कि ढाल को भी धार दीजिए।”

सूर्यप्रकाश पाण्डेय ‘सूरज’: उन्होंने अपनी बेहद भावुक कविता “धूप की पाँखों में पलती पीर कोई, मैं कि इक सूखी नदी का तीर कोई…” से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के आयोजक और संचालक पं. धीरज मिश्र ‘शाण्डिल्य ने आज के समाज के तौर-तरीकों पर सीधा कटाक्ष करते हुए पढ़ा: कि “बहुत बड़े होने की ज़िद में, बौने होकर वापस आये; ओ जंगल के शेर! बताओ, सर्कस अब कैसा लगता है?”

गौरव सिंह मीर’: शायर गौरव सिंह ने महिलाओं के सम्मान की बात उठाते हुए सुनाया “गर ज़माने भर में औरत की रहे अस्मत सलामत, क्यों कोई मंटो किसी किरदार के कपड़े उतारे।” तो तालियां गूंज उठीं।

साहित्य से सुधरता है समाज

कार्यक्रम में आए मेहमानों ने कहा कि कविताएं और कहानियां समाज का आईना होती हैं। एक अच्छा और जागरूक समाज बनाने में लेखकों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। सभी ने नई प्रतिभाओं को मंच देने के लिए फाउंडेशन की जमकर तारीफ की। इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा अनुप्रिय श्रीवास्तव और श्रीमती मंजुला सहाय ने तैयार की थी। अंत में आयोजकों ने आए हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद किया और वादा किया कि ऐसे शानदार कार्यक्रम आगे भी होते रहेंगे।

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