राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आधारशिला बताते हुए मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष बल
प्रश्नपत्र निर्माण में पूरी सावधानी बरतने, शिक्षकों के पारदर्शी चयन और शैक्षणिक अवकाश में एकरूपता लाने के निर्देश
आगरा/लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तरी क्षेत्रीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव 2026’ के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला करार देते हुए शिक्षक शिक्षा, अनुसंधान और मूल्यपरक शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के संबंध में कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता
दो दिवसीय कॉन्क्लेव के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विभिन्न पहलुओं, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद की भूमिका, राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन, मार्गदर्शन पहल ‘मित्रा’, तथा व्यावसायिक अनुपालन मानकों से जुड़ी ‘पुष्टि’ जैसी पहलों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। राज्यपाल ने कहा कि यह नीति शिक्षा को समग्र, बहुविषयक, कौशल आधारित और विद्यार्थी केंद्रित बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि प्राचीन काल से भारत ज्ञान, चिंतन और दार्शनिक चेतना की भूमि रहा है, जहाँ शिक्षा केवल ज्ञान का प्रसार नहीं बल्कि जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की साधना थी।
मातृभाषा, प्रारंभिक शिक्षा और प्रवेश की आयु पर जोर
राज्यपाल ने मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को उनकी परिचित भाषा में सीखने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृभाषा का अर्थ अन्य भाषाओं से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि मजबूत भाषाई आधार के साथ अन्य भाषाएं सीखने के द्वार खोलना है।
उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा एक में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित की गई है। छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर औपचारिक पढ़ाई का दबाव डालने के बजाय उन्हें प्रकृति, खेलकूद और परिवार के साथ संस्कारों के बीच सीखने का अवसर दिया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने विद्यालयों में बच्चों का ड्रॉपआउट पूरी तरह शून्य करने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रोजगारपरक शिक्षा और रक्षा उत्पादन पर शोध के निर्देश
सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा को आवश्यक बताते हुए राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे इस क्षेत्र की संभावनाओं पर शोध करें, आधुनिक रक्षा तकनीकों के अनुकूल पाठ्यक्रम तैयार करें और विद्यार्थियों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं से जोड़ें। उन्होंने डिग्रियां प्रदान करने में स्पष्ट राष्ट्रीय मानकों के निर्धारण पर भी बल दिया ताकि छात्रों को दूसरे राज्यों में उच्च शिक्षा या रोजगार में कोई बाधा न आए।
परीक्षा शुचिता, पारदर्शी पदोन्नति और शैक्षणिक अवकाश नीति
शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नति में पूरी पारदर्शिता बरतने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें शिक्षकों के वास्तविक शोध कार्यों, पुस्तकों, शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थानों के विकास में उनके योगदान का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों को अत्यंत सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने की कड़ी हिदायत दी, क्योंकि एक त्रुटि पूरे विभाग की छवि प्रभावित कर सकती है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश में राज्य स्तर पर एकरूपता लाने तथा छुट्टियों के सदुपयोग के रूप में विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।

गरिमामयी और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल की अनिवार्यता
राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों—विशेषकर बेटियों—की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कक्षा में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे समय के साथ स्वयं को अपडेट रखते हुए संवेदनशील, निष्पक्ष और उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य संस्कृति स्थापित करें। साथ ही, दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों के लिए आवासीय कॉलोनियों के निर्माण पर भी विचार करने की बात कही।
समापन सत्र के प्रमुख बिंदु
समारोह के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डाला। NCTE के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा और कुलपति प्रो. आशु रानी ने भी कॉन्क्लेव के उद्देश्यों और ‘मित्रा’ व ‘पुष्टि’ जैसी पहलों के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब और उत्तराखंड के शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

