जेल की सख्त दिनचर्या से परेशान श्रद्धा; महिला बंदियों से पूछ रही रिहाई के रास्ते

Anoop

October 29, 2026

नियमों के अनुसार सोने-जागने, मच्छरों और फर्श पर सोने से हो रही दिक्कत, रात में बार-बार टूट रही नींद

मुलाकाती सूची में नाम देने के बावजूद अब तक नहीं पहुंचा कोई परिजन, पुलिस सत्यापन न होने से मुलाकात पर रोक

लखनऊ। जेल की कड़ी दिनचर्या और बैरक की परिस्थितियां श्रद्धा के लिए बेहद मुश्किल भरी साबित हो रही हैं। रात के सन्नाटे में उसकी नींद बार-बार टूट रही है। मंगलवार देर रात नींद खुलने के बाद वह काफी देर तक बैठी रही और फिर बैरक में टहलकर समय बिताया। बुधवार सुबह बैरक खुलने के बाद वह अपनी बहन रश्मि के साथ परिसर में टहलती हुई नजर आई।

जेल सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा को जेल प्रशासन द्वारा तय सोने-जागने के समय और भोजन की व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मच्छरों के बीच रात गुजारने के बाद रोज सुबह छह बजे गिनती (रोल कॉल) के लिए उठना पड़ता है। इसके अलावा फर्श पर बिछी बिछावन और कंबल पर सोने से भी उसे असुविधा हो रही है।

परिजनों का इंतजार, बहन रश्मि रहती है गुमसुम

उधर, श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि को अपने परिजनों से मुलाकात का बेसब्री से इंतजार है। जेल प्रशासन को परिजनों के नाम सौंपने के बावजूद अब तक कोई भी उनसे मिलने नहीं पहुंचा है। उसकी बहन रश्मि ज्यादातर गुमसुम ही रहती है, हालांकि दोनों बहनों के बीच आपस में थोड़ी बातचीत होती है। बीते सात दिनों के दौरान केवल एक बार तीन वकीलों ने ही उनसे मुलाकात की है। इसके अलावा पुलिस सत्यापन (वेरिफिकेशन) पूरा न होने के कारण जेल प्रशासन ने फिलहाल अन्य लोगों से मुलाकात पर रोक लगा रखी है।

बाहर निकलने की जुगत और बंदियों से पूछताछ

जेल की मुश्किलों के बीच श्रद्धा जल्द से जल्द बाहर निकलने के कानूनी रास्ते तलाशने की कोशिश कर रही है। बुधवार को उसने बैरक में बंद कई महिला बंदियों से उनके मुकदमों के संबंध में जानकारी जुटाई। अपने मामले का जिक्र करते हुए उसने अन्य बंदियों से पूछा कि इस तरह के मामलों में जेल से छूटने में आमतौर पर कितना समय लग जाता है। इस पर महिला बंदियों ने उसे जेल के कायदे-कानूनों, मुकदमों की प्रक्रिया और मुलाकातों से जुड़ी जानकारियां साझा कीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *