डॉ. जीवन शुक्ल को ‘निशंक साहित्य सम्मान’ और शीला शर्मा को मिलेगा ‘विद्या मिश्र लोक संस्कृति सम्मान’

Anoop

September 19, 2026

डॉ. जीवन शुक्ल को ‘निशंक साहित्य सम्मान-2026’ और सुश्री शीला शर्मा को ‘विद्या मिश्र लोक संस्कृति सम्मान-2026’ देने का निर्णय लिया गया

सम्मान 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ के निराला सभागार में डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ की 108वीं जयंती पर होने वाले समारोह में दिया जाएगा

लखनऊ। डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ अध्ययन संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित साहित्य एवं संस्कृति सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। संस्थान की निर्णायक समिति ने सर्वसम्मति से ‘डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक साहित्य सम्मान-2026’ के लिए कन्नौज के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ल तथा ‘विद्या मिश्र लोक संस्कृति सम्मान-2026’ के लिए लखनऊ की विख्यात चित्रकार शीला शर्मा का चयन किया है।

डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ अध्ययन संस्थान के मंत्री मुकुल मिश्र ने बताया कि यह सम्मान आगामी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ के ‘निराला सभागार’ में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा। यह आयोजन डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ की 108वीं जयंती के अवसर पर अपराह्न 3:30 बजे से आयोजित होगा, जिसमें श्री उदय प्रताप सिंह एवं प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। सम्मानित साहित्यकार एवं कलाकार को पुरस्कार स्वरूप ₹11,000 की धनराशि, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र भेंट किया जाएगा।

संस्थान के अनुसार, पुरस्कारों का निर्णय डॉ. कमला शंकर त्रिपाठी, प्रो. ऊषा सिन्हा, योगेंद्र द्विवेदी तथा डॉ. आलोक मिश्र आदि प्रबुद्ध सदस्यों की निर्णायक समिति द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया।

डॉ. जीवन शुक्ल (साहित्य सम्मान): 03 अप्रैल 1932 को फतेहपुर (उ.प्र.) में जन्मे डॉ. जीवन शुक्ल पी.एस.एम. डिग्री कॉलेज, कन्नौज में कई दशकों तक अंग्रेजी विभागाध्यक्ष रहे। उन्होंने हिंदी साहित्य की श्रीवृद्धि में अभूतपूर्व योगदान दिया है। वर्ष 1961 में निराला जी को समर्पित उनका पहला काव्य संकलन ‘वंशी तुम धर दो’ प्रकाशित हुआ, जिसका लोकार्पण सुमित्रानंदन पंत जी के कर-कमलों द्वारा हुआ था। मद्रास विश्वविद्यालय ने उनके वीर काव्य ‘सिंह द्वार’ को अपने पाठ्यक्रम में स्थान दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में अजगव (1971), झाऊ की ओट में गुलाब (1996), तराशी आत्मा (2005), तुम न होगे तो (2011), दर्द साक्षर हो गया (2015), सूरज के बाद भी (2016), तोड़ता है कमरे का शीशा (2016), हुस्ने बयां (2018) और कलम अभी जिंदा है (2022) शामिल हैं।

फुट पेंटर शीला शर्मा (लोक संस्कृति सम्मान): लखनऊ विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) करने वाली शीला शर्मा का जीवन संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल है। मात्र 4 वर्ष की आयु में एक दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पैरों से उत्कृष्ट पेंटिंग्स बनाने की कला में महारत हासिल की। कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वे उत्तर प्रदेश के अलाव देश-विदेश में भी पुरस्कृत हो चुकी हैं। वर्तमान में वे ‘शी बिल्ड कला प्रशिक्षण केंद्र’ (उन्नाव) का संचालन कर दिव्यांगों और वंचित बच्चों को मुफ्त चित्रकला व मूर्तिकला का प्रशिक्षण दे रही हैं।

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