‘क्रिकेट एसोसिएट्स’ की अपील खारिज, आगरा मंडल आयुक्त ने यूपीसीए के वैधानिक अधिकारों पर लगाई मुहर

Prashant

June 5, 2026

“उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएट्स” की दायर की गई अपील को सिरे से निरस्त

उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए कम्पनी) को सफलता मिली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में क्रिकेट प्रशासन और विधिक अधिकारों की लड़ाई में उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए कम्पनी) को एक बड़ी न्यायिक सफलता मिली है। आयुक्त, आगरा मंडल के माननीय न्यायालय ने वाद संख्या 3604/2025 में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तथाकथित “उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएट्स” द्वारा दायर की गई अपील को सिरे से निरस्त कर दिया है। 25 मई 2026 को पारित इस आदेश के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि प्रदेश में क्रिकेट संचालन के नाम पर भ्रम फैलाने और समानांतर संस्था खड़ी करने के प्रयास विधिक रूप से अमान्य हैं।

माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में बेहद स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए उल्लेख किया है कि “उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन” के नाम से पूर्व से ही एक विधिक रूप से स्थापित एवं पंजीकृत संस्था अस्तित्व में है। ऐसे में लगभग समान नाम और समान उद्देश्यों के साथ किसी अन्य संस्था द्वारा पंजीकरण प्राप्त करने का प्रयास पूरी तरह से विधि सम्मत नहीं है। कोर्ट ने माना कि पूर्व से स्थापित स्थापित संस्था के नाम से मिलते-जुलते नाम का उपयोग कर पंजीकरण कराना अनुचित था, इसलिए संबंधित फर्जी या भ्रामक पंजीकरण को निरस्त करने का पूर्व आदेश विधिक रूप से बिल्कुल सही है।

इस निर्णय के बाद उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (कम्पनी) की वैधानिक स्थिति और अधिकारों की एक बार फिर से पुष्टि हो गई है। साथ ही, पिछले लंबे समय से संस्था और उसके वर्तमान पदाधिकारियों के विरुद्ध लगातार चलाए जा रहे भ्रामक व तथ्यहीन दुष्प्रचार को भी न्यायिक स्तर पर करारा झटका लगा है। विशेष रूप से, जी.डी. शर्मा द्वारा खेल जगत और आम जनता में भ्रम उत्पन्न करने के लिए जो लगातार प्रयास किए जा रहे थे, वे इस अदालती आदेश के बाद पूरी तरह धाराशायी और असफल सिद्ध हुए हैं। माननीय न्यायालय के इस फैसले ने विधिक स्थिति को आईने की तरह साफ करते हुए ऐसे सभी दुष्प्रचारों की वास्तविकता को उजागर कर दिया है।

इस ऐतिहासिक आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के प्रवक्ताओं ने कहा कि संस्था सदैव पारदर्शिता, विधिक प्रक्रियाओं के पालन और क्रिकेट प्रशासन की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रही है। कोर्ट का यह फैसला न्याय और सच्चाई की जीत है। एसोसिएशन भविष्य में भी बिना किसी गतिरोध के प्रदेश में क्रिकेट के सर्वांगीण विकास, खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा तथा खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर काम करती रहेगी।

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