एआई और डीपफेक के दौर में भी अपराधियों को खोज निकालेगी यूपी पुलिस: सीएम योगी

Anoop

October 24, 2026

नए कानूनों का असर: 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब और 150 से अधिक वैन तैनात

‘सीआईडी’ जैसी आधुनिक जांच: 42 साल पुराने मामले का जिक्र कर बोले सीएम योगी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी आधुनिक तकनीकों के इस दौर में भी अपराधी कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। अपराधी तकनीक का चाहे कितना भी सहारा क्यों न ले लें, उत्तर प्रदेश की मजबूत वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उन्हें ढूंढ निकालेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई जांच में मददगार हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता; तकनीक का संचालन हमेशा मानव विवेक से होना चाहिए न कि मनुष्य पूरी तरह तकनीक पर निर्भर हो जाए।

शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के बेहतर समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे अदालतों में न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में काम करने वाले ‘LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन भी किया।

प्रदेश की बदलती कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए सीएम योगी ने बताया कि जिस 100 एकड़ भूमि पर आज यह फॉरेंसिक संस्थान बना है, उस पर वर्ष 2017 से पहले लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का अवैध कब्जा था। सरकार बनते ही सख्त कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर जमीन खाली कर दी। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था, लेकिन आज वही स्थान वैज्ञानिक जांच और तकनीकी शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

फॉरेंसिक विज्ञान की जरूरत को समझाते हुए उन्होंने लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘सीआईडी’ का जिक्र किया और कहा कि जो चीजें लोग पहले टीवी पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट से अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है, आज फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से वास्तविक जीवन में भी वैसी ही सटीक जांच संभव हो रही है। उन्होंने वर्ष 1980 के एक माफिया मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि समय पर सही डीएनए और फॉरेंसिक साक्ष्य न जुटाए जाने के कारण उसे 42 साल बाद 2022 में सजा मिल सकी। यह उदाहरण दिखाता है कि अपराध स्थल से तुरंत वैज्ञानिक सबूत जुटाना कितना महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत 7 वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं, जिनमें से 12 पूरी हो चुकी हैं और 6 अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन भी तैनात की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है, जिससे डिजिटल और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलेगी।

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