गांधी-शास्त्री जयंती पर राजभवन में कार्यक्रम: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दी श्रद्धांजलि, बोलीं— ‘स्वच्छता को बनाएं अपनी आदत’

Anoop

October 2, 2026

दफ्तरों में फाइलें न लटकाएं, स्वच्छता को बनाएं रोजमर्रा की आदत

कर्मचारियों में बढ़े आपसी मेलजोल, बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर संवारें शिक्षक

लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के मौके पर शुक्रवार को राजभवन (जन भवन) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोनों महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इस दौरान राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

कार्यक्रम में जन भवन आदर्श माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ जैसे गांधी जी के प्रिय भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी। राज्यपाल ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि गांधी जी और शास्त्री जी का जीवन हमें सच्चाई, सादगी और देश सेवा की सीख देता है। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि ‘वैष्णव जन’ भजन के अर्थ को समझें और इसे अपने व्यवहार में उतारें।

स्वच्छता केवल अभियान नहीं, कार्यसंस्कृति बने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सफाई केवल किसी अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे अपनी रोजमर्रा की आदत और काम करने के तरीके (वर्क कल्चर) में शामिल करना चाहिए। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि दफ्तरों में फाइलें अटका कर न रखी जाएं और कूड़े-कचरे का समय पर निस्तारण हो। उन्होंने बड़े अफसरों को अपने अधीनस्थों के कमरों का निरीक्षण करने और केंद्र सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ से जुड़कर सफाई पर ध्यान देने की बात कही।

टीम भावना और बच्चों के हुनर पर दिया जोर राजभवन में टीम भावना बढ़ाने के लिए राज्यपाल ने अधिकारियों को साइकिल यात्रा जैसे सामूहिक आयोजन दोबारा शुरू करने की सलाह दी, ताकि बड़े-छोटे कर्मचारियों के बीच झिझक खत्म हो। अपने गुजरात प्रवास और शिक्षा मंत्री रहने के दिनों को याद करते हुए उन्होंने साबरमती आश्रम, कोचरब आश्रम और पोरबंदर जैसे गांधी जी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की बात कही और बच्चों को ऐसे स्थानों का टूर कराने का सुझाव दिया।

शिक्षकों और अधिकारियों को निर्देश देते हुए राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें। उनके अंदर छिपे हुनर और प्रतिभा को पहचानें। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब राजभवन स्कूल के बच्चे अयोध्या और वाटर पार्क घूमने गए थे, तो उनके अनुभवों की एक किताब बनाई गई थी। ऐसे रचनात्मक कामों से बच्चों की सोचने और लिखने की क्षमता बेहतर होती है।

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