सकारात्मक दृष्टिकोण और सुशासन का प्रतीक: दिव्यांगजनों को सशक्त एवं स्वावलंबी बना रही प्रदेश सरकार
509 दिव्यांगजनों को 664 सहायक उपकरण वितरित: योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचाना ही सुशासन का मुख्य सूत्र
गोरखपुर/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग केवल एक शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में बदलाव का परिचायक था। दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सम्मान अत्यंत आवश्यक है। उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के मार्ग की सभी बाधाओं को दूर कर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री जी आज गोरखपुर में प्रधानमंत्री जी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 509 दिव्यांगजनों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, 310 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड, स्मार्टफोन, ब्रेल गीता और ब्रेल रामचरितमानस जैसे उपकरण शामिल हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता और मजबूती से पहुंच रहा है। बिना भेदभाव के योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश सरकार एवं हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (HURL) के संयुक्त तत्वावधान में बांटे जा रहे यह उपकरण दिव्यांगजनों के सपनों को नई उड़ान देने का एक प्रयास हैं।
भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः’ अर्थात कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, बस उसकी प्रतिभा को पहचानने वाला योजक दुर्लभ होता है। प्रधानमंत्री जी जैसे योजक के नेतृत्व में आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ रहा है। इतिहास गवाह है कि परिवार और समाज का सहयोग मिले तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा के मार्ग में बाधक नहीं बनतीं। उन्होंने ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रविंद्र जैन तथा एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा सहित टोक्यो पैरालंपिक और प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का उदाहरण देकर स्पष्ट किया कि प्रतिभा को दया नहीं, बल्कि अवसर और उचित मंच चाहिए।
प्रदेश सरकार की कटिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि दिव्यांगजन पेंशन को 300 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये किया गया है और शीघ्र ही इसमें और वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा, कॉक्लियर इंप्लांट के लिए सरकार प्रति बच्चा 6 लाख रुपये तक का खर्च वहन कर रही है तथा स्पीच थेरेपी में भी सहायता दे रही है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को डिजिटल कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
आगामी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में 3 से 7 वर्ष के श्रवण बाधित, बौद्धिक एवं दृष्टिबाधित बच्चों के लिए जनपद स्तर पर ‘बचपन डे केयर सेंटरों’ के विस्तार का प्राविधान किया गया है। साथ ही वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने प्रदेश की सभी 18 कमिश्नरियों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (DDRC) संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां दिव्यांगजन कल्याण के लिए 2 विश्वविद्यालय (डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट) संचालित हैं।
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य मंत्री संजय निषाद, स्थानीय जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

