समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश व केंद्र की सरकार पर बोला हमला
सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि भाजपा के शब्दकोश में जवाबदेही नाम का कोई शब्द ही नहीं रह गया है
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश व केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा के शब्दकोश में जवाबदेही नाम का कोई शब्द ही नहीं रह गया है। उन्होंने हमीरपुर जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वर्षों से सड़क निर्माण की गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की, तो छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को मजबूरन जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए उतरना पड़ा। बच्चों के इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि यदि भाजपा का अहंकारी शासन-प्रशासन जनता तक नहीं पहुँचेगा, तो जनता खुद उन तक पहुँचने का रास्ता निकाल लेगी।
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा नेता देश में एकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन उनका यह रवैया अब और चलने वाला नहीं है। जनप्रतिनिधियों और लोक सेवकों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र नीचे से ऊपर की ओर चलता है, न कि ऊपर से नीचे। सत्ता समाज की भलाई के लिए होती है और इसी समाजवादी मूल्य को अब सभी को स्वीकार करना पड़ेगा।
संसद भवन परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकारों पर चौतरफा भ्रष्टाचार के आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ भाजपा सत्ता में है, वहाँ बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और बजट की लूट मची हुई है। जेवर एयरपोर्ट परिसर में पानी भरने, नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर गड्ढे बनने और सड़क धंसने, जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकियों के ढहने और यहाँ तक कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी होने जैसी गंभीर घटनाएँ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भ्रष्टाचार इस कदर चरम पर पहुँच चुका है कि मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, लेकिन इतनी अनियमितताओं के बावजूद सरकार में किसी भी स्तर पर कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने संसद में उठाए जा रहे विभिन्न मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष इस बिल के खिलाफ एकजुट है, क्योंकि इस सरकार का हर कानून अल्पसंख्यकों के अधिकारों को प्रभावित करने वाला होता है। वहीं संसद में जवाब देने के लिए सरकार द्वारा समय-सीमा तय किए जाने की कवायद को उन्होंने पूरी तरह अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसी सवाल का पारदर्शी जवाब देने की नहीं, बल्कि सिर्फ थोथा बयान जारी कर सत्र को जल्द से जल्द समाप्त करने की है। देश अब केवल जुमले और भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि भगवान और इंसान दोनों से जुड़े इन बेहद गंभीर मुद्दों पर ठोस और सख्त कार्रवाई की उम्मीद करता है।

