यूपी: मिड-डे मील व्यवस्था से ग्राम प्रधानों का दखल खत्म, अब अभिभावक समिति संभालेगी कमान; फैसलों पर विरोध तेज

Anoop

August 1, 2026

परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के संचालन और खातों की देखरेख में सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव

महानिदेशालय स्कूली शिक्षा के आदेश के मुताबिक अब इस प्रक्रिया से ग्राम प्रधानों की भूमिका पूरी तरह समाप्त कर दी गई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के संचालन और खातों की देखरेख में सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। महानिदेशालय स्कूली शिक्षा द्वारा जारी नए आदेश के मुताबिक, अब इस प्रक्रिया से ग्राम प्रधानों की भूमिका पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

अब मिड-डे मील योजना का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष—जो कि किसी छात्र के अभिभावक होंगे—और संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक मिलकर करेंगे। रसोइयों के मानदेय का भुगतान हो या भोजन तैयार करने के लिए मिलने वाला कंटीजेंसी फंड, दोनों का प्रबंधन भी अब अभिभावक समिति के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।

ग्राम प्रधान संगठनों ने खोला मोर्चा

सरकार के इस फैसले पर ग्राम प्रधान संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। ‘राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन’ के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा का कहना है कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी प्रधान बतौर प्रशासक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें इस व्यवस्था से बाहर करना उनके अधिकारों में सीधे तौर पर कटौती है। संगठन ने सरकार से इस नए आदेश को तुरंत वापस लेते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।

बालिका इंटर कॉलेज में पुरुष प्रधानाचार्य की तैनाती पर भी रार

दूसरी ओर, माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में पदोन्नति पाए 326 समूह ‘ख’ के शिक्षकों और अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है। हालांकि, प्रयागराज स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (धनूपुर) में कैलाश यादव को प्रधानाचार्य बनाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ का विरोध:

  • संघ ने अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को पत्र भेजकर मांग की है कि बालिका इंटर कॉलेजों में पुरुष संवर्ग के अधिकारियों की नियुक्ति न की जाए।
  • प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव और संरक्षक रामेश्वर पांडेय का कहना है कि कई राजकीय विद्यालय बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं, जबकि कई अधिकारियों को बेसिक अनुभाग की संस्थाओं में भेजा गया है, जो कि अनुचित है।
  • संघ ने मांग की है कि बेसिक अनुभाग में भेजे गए अधिकारियों को वहां से हटाकर खाली पड़े राजकीय विद्यालयों में तैनात किया जाए।
  • साथ ही, संघ पदाधिकारियों ने चित्रकूट के मानिकपुर और अमेठी के मुसाफिरखाना स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में वर्षों से नियमित प्राचार्या न होने और वहां चल रही अव्यवस्थाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

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