गोमती तट पर देश के सजग प्रहरियों की वीरता को समर्पित ‘
नौसेना शौर्य वाटिका’ (नौसेना शौर्य संग्रहालय का द्वितीय चरण) का भव्य लोकार्पण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब केवल अपनी तहजीब और संस्कृति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और सैन्य पराक्रम की पहचान से भी दुनिया को रूबरू कराएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती तट पर देश के सजग प्रहरियों की वीरता को समर्पित ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ (नौसेना शौर्य संग्रहालय का द्वितीय चरण) का भव्य लोकार्पण किया। 2 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैली इस खूबसूरत और भव्य वाटिका का निर्माण करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ में नौसेना शौर्य वाटिका का उद्घाटन हर देशवासी के लिए सम्मान और गौरव का क्षण है। आने वाले समय में यह स्थल न केवल लखनऊ के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगा, बल्कि एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में उभरेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ कानून-व्यवस्था आज देश में एक मिसाल बन चुकी है, जिसने राज्य की छवि को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ से बदलकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के रूप में स्थापित कर दिया है।
जब आई.एन.एस. गोमती ने लखनऊ के बंधन को किया अमर
रक्षा मंत्री ने लखनऊ और नौसेना के ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 1988 में नौसेना में शामिल हुए युद्धपोत ‘आई.एन.एस. गोमती’ के आधिकारिक चिन्ह (क्रेस्ट) पर लखनऊ की ऐतिहासिक छतर मंजिल अंकित थी। जब यह पोत हिंद महासागर में अपनी ताकत दिखाता था, तब लखनऊ का गौरव भी समुद्र की लहरों पर तैरता था। 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद इसी युद्धपोत की वास्तविक युद्ध सामग्रियों को इस शौर्य वाटिका में जीवंत रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग असली विशालकाय मिसाइल, दुश्मन की पनडुब्बियों को तबाह करने वाले टारपीडो ट्यूब, अत्याधुनिक रडार और मुख्य तोप को करीब से देख और छू सकेंगे। इसके साथ ही नेवी के सर्विलांस एयरक्राफ्ट और मल्टीरोल हेलीकॉप्टर भी लखनऊ की इस धरती पर स्थापित हो चुके हैं।
‘पंचप्रण’ का आधार है सेना का सम्मान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय नौसेना को ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (आकाश की ऊंचाइयों को छूने वाली विराट सोच) का प्रतीक बताते हुए कहा कि बड़े लक्ष्यों के लिए हमेशा विराट सोच का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘पंचप्रण’ में सेना और वर्दीधारी बल के प्रति सम्मान का भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण है। जब हमारे सैनिक माइनस डिग्री तापमान, झुलसा देने वाली गर्मी और समुद्र के थपेड़ों के बीच देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, तभी देश के 140 करोड़ नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं और देश सुरक्षित माहौल में आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषि परंपरा ने हमें ‘अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च’ का पाठ पढ़ाया है, जिसका अर्थ है कि सामान्य जीवन में अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है, लेकिन देश और समाज की सुरक्षा के लिए खतरा बने दुश्मनों के खिलाफ सेना का शस्त्र उठाना ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर के प्रमुख चौराहों पर सेना के सेवानिवृत्त टैंक (Retired Tanks) प्रदर्शित किए जाएं ताकि नई पीढ़ी को देश सेवा की लगातार प्रेरणा मिलती रहे।
रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा भारत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के बदलते सामरिक परिदृश्य की चर्चा करते हुए कहा कि 2014 के बाद से भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। देश का घरेलू रक्षा उत्पादन जो पहले मात्र 46,000 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और जून के अंत तक पौने दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वहीं, देश का डिफेंस एक्सपोर्ट भी 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यूपी का डिफेंस कॉरिडोर और लखनऊ में बन रही ब्रह्मोस मिसाइल देश की इस मैन्युफैक्चरिंग ताकत को नई मजबूती दे रहे हैं।
इस गरिमामयी समारोह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कई सांसद, विधायक और लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

