कुर्बानी का त्योहार देता है त्याग और इंसानियत का पैगाम
चार बार के शासनकाल की याद दिलाकर किया पलटवार
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के पावन अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को दिली मुबारकबाद दी है। इस मौके पर जारी अपने विशेष संदेश में बसपा सुप्रीमो ने त्योहार की बधाई देने के साथ-साथ देश की मौजूदा सियासी आबोहवा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि बसपा उस राजनीति के कड़े खिलाफ है जो मंदिर-मस्जिद के नाम पर समाज को बांटकर वोट बटोरने का काम करती है।
बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में मायावती ने कहा कि ईद-उल-अजहा का यह पाक त्योहार हमें आत्मत्याग, आपसी भाईचारे और इंसानियत का सबसे बड़ा पैगाम देता है। बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि “आज जब देश में नफरत की राजनीति हावी हो रही है और भाई को भाई से लड़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, तब ईद का यह अमनपरस्त संदेश और भी ज्यादा प्रासंगिक और जरूरी हो जाता है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए उत्तर प्रदेश की जनता से एक बार फिर पुराना भरोसा बहाल करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि बसपा के चार बार के शासनकाल के दौरान प्रदेश के हर घर में बरकत, हर दिल में अमन और हर बस्ती में खुशहाली का माहौल था। बसपा आज भी उत्तर प्रदेश को उसी विकास और कानून व्यवस्था के मार्ग पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति के तहत एक सर्वसमाज-हितैषी सरकार देने के अपने संकल्प पर अडिग है।
“संविधान सर्वोपरि, देश में हर नागरिक बराबर”
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि हमारा संविधान स्पष्ट रूप से सिखाता है कि इस देश का हर नागरिक बराबर है, चाहे उसका मजहब या जाति कोई भी हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि बसपा एक ऐसे अखंड और मजबूत भारत की पक्षधर है, जहां ईद, दिवाली और होली जैसे सभी त्योहार समाज के सभी लोग मिलकर और आपसी मोहब्बत के साथ मनाएं।

