साहित्य और संस्कृति का संगम: रवीन्द्रालय में 10 दिवसीय लखनऊ पुस्तक मेला शुरू

Prashant

March 14, 2026

लेखिका विपुल बी. वार्ष्णेय की पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ का विमोचन आज

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने किया मेले का किया भव्य उद्घाटन

लखनऊ। राजधानी के ऐतिहासिक चारबाग स्थित रवीन्द्रालय परिसर में ‘विकसित भारत-विकसित प्रदेश’ थीम से दस दिवसीय लखनऊ पुस्तक मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि और प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया।

उद्घाटन संबोधन में योगेंद्र उपाध्याय ने पुस्तकों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्हें मनुष्य का सच्चा मित्र, मार्गदर्शक और गुरु बताया। उन्होंने मैकाले की शिक्षा पद्धति पर प्रहार करते हुए सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री जी ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान-विज्ञान के इस महाकुंभ में युवा पीढ़ी को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने आगामी पुस्तक मेला आगरा में आयोजित करने की भी घोषणा की।

मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल के अनुसार, 22 मार्च तक चलने वाले इस आयोजन में प्रवेश पूर्णतः नि:शुल्क है और प्रत्येक पुस्तक पर न्यूनतम 10% की छूट प्रदान की जा रही है। सुबह 11 बजे: नवसृजन प्रकाशन का पुस्तक का लोकार्पण होगा।

  • लेखिका विपुल बी. वार्ष्णेय की पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ का विमोचन आज

पुस्तक मेले के अंतर्गत 14 मार्च, शाम 5:30 बजे लेखिका विपुल बी. वार्ष्णेय की लिखी एवं अलका प्रमोद के अनुवाद में पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ का विमोचन होगा। पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह की अध्यक्षता और डॉ. आनंद प्रकाश माहेश्वरी के विशिष्ट आतिथ्य में होने वाला यह सत्र अवध की आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है। 5 वर्षों के गहन शोध पर आधारित यह पुस्तक अयोध्या, लखनऊ और प्रयागराज सहित पूरे अवध क्षेत्र के लगभग 200 मंदिरों, घाटों और लुप्तप्राय धरोहरों का सचित्र संकलन है। लेखिका ने रामायण व महाभारत काल से जुड़े पौराणिक संदर्भों और स्थापत्य कला को जीवंत किया है। यह कृति शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए एक अनूठा मार्गदर्शक सिद्ध होगी।

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