विश्व फोटोग्राफी दिवस: तस्वीरों के समंदर में रघु राय की अनकही गाथा

Anoop

August 19, 2026

‘द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की ओर से आयोजित 10वीं सामूहिक फोटो प्रदर्शनी

पद्मश्री स्वर्गीय रघु राय के महान योगदान को नमन करते हुए उन्हें किया आयोजन समर्पित

लखनऊ। कैमरे के लेंस से छनकर जब कोई लम्हा कागज़ पर उतरता है, तो वह सिर्फ एक तस्वीर नहीं बनता, बल्कि ज़माने के लिए इतिहास का एक अमर दस्तावेज़ बन जाता है। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर अलीगंज स्थित ‘कलाश्रोत आर्ट गैलरी’ जब रंगों, छायाओं और मानवीय संवेदनाओं के जीवंत कैनवास में तब्दील हुई, तो पूरा माहौल एक ख़ामोश लेकिन बेहद गहरी नज़्म सा महसूस होने लगा। ‘द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की ओर से आयोजित 10वीं सामूहिक फोटो प्रदर्शनी ने इस बार महज़ दृश्यों का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारतीय फोटोग्राफी के शलाका पुरुष और पद्मश्री स्वर्गीय रघु राय के महान योगदान को नमन करते हुए उन्हें यह पूरा आयोजन समर्पित कर दिया।

प्रदर्शनी के मुहाने पर जैसे ही रघु राय की ढेरों अविस्मरणीय तस्वीरें नज़र आईं, कलाप्रेमियों और साथी छायाकारों की आंखें श्रद्धा से नम हो उठीं। कार्यक्रम का सबसे भावुक लम्हा वह था जब उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर शहर के सभी फोटो जर्नलिस्ट और कलाप्रेमियों ने उस महान दूरद्रष्टा को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने दशकों तक भारत की धड़कनों, यहां की राजनीति, सामाजिक उथल-पुथल, सतरंगी संस्कृति और आम आदमी की जिजीविषा को अपने कैमरे में अमर किया था।

  • कैमरों का संगम, जिंदगी के अनगिनत रंग

इस सामूहिक कला-उत्सव में 70 से अधिक छायाकारों की उंगलियों ने जब शटर दबाया, तो वक्त ठहर सा गया। प्रदर्शनी की दीवारों पर टंगी हर एक तस्वीर अपनी एक अलग दास्तान सुनाती दिखी। धूल से सने गांव के रास्ते, कंक्रीट के जंगलों में सिमटती शहर की जिंदगी, कुदरत के अनछुए रूप और रोजमर्रा के संघर्ष में छिपती मानवीय मुस्कान।

द यूथ फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष व सीनियर फोटोग्रॉफर साहिल सिद्दकी ने कहा कि अलग-अलग कोणों से ली गई इन तस्वीरों में सिर्फ छाया और रोशनी का खेल नहीं था, बल्कि समाज के प्रति गहरी जवाबदेही और संवेदना की महक भी साफ महसूस हो रही थी। “विश्व फोटोग्राफी दिवस सिर्फ लेंस और शटर का उत्सव नहीं है; यह उन महान हस्तियों को याद करने का दिन है जिन्होंने फोटोग्राफी को समाज का आईना और उसकी आवाज़ बनाया। रघु राय साहब को यह प्रदर्शनी समर्पित करना उस ऐतिहासिक विरासत को अगली पीढ़ी तक ले जाने का एक छोटा सा प्रयास है।”

युवा धड़कनों में रघु राय का अक्स

प्रदर्शनी में आए नौजवान छायाकारों के लिए रघु राय का काम किसी पवित्र ग्रंथ से कम नहीं था। युवा फोटोग्राफरों ने स्वीकार किया कि एक मुकम्मल तस्वीर वही है जो देखने वाले के दिल में लहरें पैदा कर दे। उनके लिए रघु राय की एक-एक फ्रेम में बिखरी संजीदगी आने वाले वक्त में भी बेहतर काम करने और समाज की धड़कनों को करीब से महसूस करने की प्रेरणा देती रहेगी।

अनुभवी और उभरती प्रतिभाओं को एक ही छत के नीचे लाकर यह 10वीं सामूहिक फोटो प्रदर्शनी न केवल कलात्मक ऊंचाइयों को छूती नज़र आई, बल्कि उसने फोटो पत्रकारिता के उस सामाजिक सरोकार को भी रेखांकित किया, जो बिना एक शब्द बोले भी दुनिया की सबसे बड़ी सच्चाई बयां कर देता है।

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