धर्म – कर्म

सज्जनों की संगत भी नहीं बदलती दुष्ट की फितरत,साँप चाहे चंदन के नीचे ही क्यों न छुपा हो!

नीच निचाई नही तजई, सज्जनहू के संग। तुलसी चंदन बिटप बसि, बिनु बिष भय न भुजंग।। तुलसीदास जी कहते हैं कि अधम यानी नीच व्यक्ति सज्जन लोगों के साथ कितना…