ऊर्जा के उजास से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश

Anoop

August 31, 2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा सुधारों से राजस्व वसूली बढ़ाकर वर्ष 2023-24 में ₹1,03,600.48 करोड़ की और आरडीएसएस योजना से 92 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए

राज्य में ताप विद्युत क्षमता बढ़कर 9,120 मेगावाट पहुँची और बुंदेलखंड ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर व ‘धरती आबा योजना’ से लाखों ग्रामीण परिवारों तक सौर व निर्बाध बिजली पहुँचाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए ऊर्जा क्षेत्र को आधारशिला मानकर इसमें व्यापक सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण, उपभोक्ता सुविधाओं और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक को निर्बाध, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है।

विद्युत उपकेंद्रों के संविदा कार्मिकों और अधिकारियों के प्रोत्साहन के लिए शुरू की गई योजना से राजस्व वसूली में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहाँ 70,531.26 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, वहीं 2022-23 में 83,564.35 करोड़, 2023-24 में 1,03,600.48 करोड़ तथा 2024-25 में 96,138.68 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रहित किया गया।

तकनीकी आधुनिकीकरण के तहत आरडीएसएस योजना के माध्यम से 30 जून 2026 तक 92,90,143 उपभोक्ताओं के यहाँ स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। ब्लॉक स्तर के सभी सरकारी परिसरों, 3,78,690 वितरण परिवर्तकों तथा 26,984 11 केवी पोषकों पर भी स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। उपभोक्ता यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप से अपनी बिजली खपत की निगरानी और रिचार्ज कर सकते हैं। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्मार्ट मीटर डिस्कनेक्शन/री-कनेक्शन पर लगने वाले 50 रुपये के शुल्क को समाप्त कर दिया गया है तथा प्री-पेड स्मार्ट मीटरों को पोस्ट-पेड मोड में बदलने की सुविधा दी जा रही है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण निजी नलकूप उपभोक्ताओं को एकल फसल सिंचाई हेतु सीजनल टैरिफ और अस्थायी संयोजन की सुविधा प्रदान की गई है। साथ ही आम नागरिकों और उद्योगों को राहत देते हुए वर्ष 2019-20 के बाद से बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से ग्रीन एनर्जी टैरिफ को और आकर्षक बनाया गया है। एचटी उपभोक्ताओं के लिए इसे घटाकर 0.34 रुपये प्रति यूनिट तथा एलटी उपभोक्ताओं के लिए 0.17 रुपये प्रति यूनिट किया गया है। ई-मोबिलिटी को प्रोत्साहन देने के लिए सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों का टैरिफ राज्य परिवहन के लिए अनुमन्य किया गया है और रीजनल रैपिड ट्रांजित सिस्टम की दरों को मेट्रो सेवाओं के समान रखा गया है। इसके अलावा, आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्रों को उद्योग का दर्जा देकर औद्योगिक दरों पर विद्युत सुविधाएं दी जा रही हैं।

उपभोक्ता शिकायतों के पारदर्शी और त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2025 तक 35 ज़ोन और 75 मंडलों में सीजीआरएफ (CGRF) का गठन किया गया है। 17 अक्टूबर 2025 से ऑनलाइन सीजीआरएफ पोर्टल कार्यरत है। अब बिजली बिल हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी किए जा रहे हैं और ई-मेल या व्हाट्सऐप के जरिए डिजिटल बिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।

ताप विद्युत उत्पादन में भी बड़ा उछाल आया है। वर्ष 2016-17 की 5,784 मेगावाट क्षमता के मुकाबले जून 2026 तक यह बढ़कर 9,120 मेगावाट हो गई है। संयंत्र लोड फैक्टर (PLF) 2016-17 के 68.42% से बढ़कर 2025-26 में 80.68% और जून 2026 तक 83.34% तक पहुँच गया। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने 25 मई 2025 को 8004 मेगावाट (94.61% PLF) का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया।

जल विद्युत के क्षेत्र में रिहंद जल विद्युत गृह (पिपरी) की क्षमता 230 मेगावाट से बढ़ाकर 300 मेगावाट की गई। नई तापीय परियोजनाओं जैसे हरदुआगंज (1×660 मेगावाट), जवाहरपुर, ओबरा ‘सी’ और पनकी तापीय परियोजना की द्वितीय इकाई से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है।

हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बुंदेलखंड ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तहत 4,000 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क से उत्पादित ऊर्जा की निकासी हेतु 21 पारेषण उपकेंद्रों का निर्माण तेजी से जारी है। दूरदराज के क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाने के लिए आरडीएसएस के तहत 917.28 करोड़ रुपये की लागत से 19,503 मजरों और 2,51,487 घरों का विद्युतीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा, ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत जनजातीय बहुल क्षेत्रों में 31.86 करोड़ रुपये से 6,867 घरों व संस्थानों को विद्युत सेवा से जोड़ा जा रहा है।

उत्पादन से वितरण और पारंपरिक ऊर्जा से हरित ऊर्जा तक उत्तर प्रदेश की यह दूरगामी नीतियाँ राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही हैं।

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