उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का चतुर्थ द्विवार्षिक सम्मेलन
शनिवार को कैसरबाग स्थित गांधी भवन प्रेक्षागृह में जुटे निविदा/संविदा कर्मी हुए शामिल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का चतुर्थ द्विवार्षिक सम्मेलन शनिवार को कैसरबाग स्थित गांधी भवन प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ। सम्मेलन में प्रदेश भर से आए बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और समस्याओं का समाधान न होने पर प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी दी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से लेबर के अनुबंध पर लाइनमैन और उपकेंद्र परिचालक जैसे तकनीकी और जोखिम भरे कार्य करा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। वहीं, प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने अपने ही आदेशों का उल्लंघन करते हुए लगभग 25,000 कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हटाए गए कर्मचारियों को वापस नहीं लिया गया, तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रमुख मांगें और वर्टिकल व्यवस्था का विरोध
प्रदेश उपाध्यक्ष हर्षवर्धन ने पिछले कई वर्षों से लंबित 18,000 रुपये वेतन की मांग को तत्काल लागू करने पर जोर दिया। संगठन ने वर्तमान वर्टिकल व्यवस्था को कर्मचारी उत्पीड़न का कारण बताया, जिससे उपभोक्ताओं को भी बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने आउटसोर्स सेवा निगम में जाने का विरोध करते हुए पुरानी व्यवस्था की बहाली की मांग की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री का समर्थन
संगठन के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर ने सम्मेलन में शिरकत करते हुए कर्मचारियों की छंटनी की घोर निंदा की। उन्होंने कहा कि “वर्टिकल व्यवस्था” से जनता भी परेशान है और बिजली अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इन सभी विसंगतियों और आउटसोर्स सेवा निगम के लाभों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।
सम्मेलन में के.डी. मिश्र, मोती सिंह, भानू प्रताप सिंह और अरविंद श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और एकजुटता का आह्वान किया।

