सावधान लखनऊ! सांसों पर मंडरा रहा खतरा; दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बना नवाबों का शहर

Prashant

March 28, 2026

डब्लूएचओ की सीमा से 10 गुना ज्यादा प्रदूषण रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं

लखनऊ की हवा में प्रदूषण का स्तर (पीएम 2.5) सुरक्षित सीमा से ऊपर जा चुका है

लखनऊ। नवाबों के शहर की हवा अब सेहत के लिए ‘जहर’ बनती जा रही है। स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित एयर क्वालिटी एजेंसी आईक्यू एयर की ताजा रिपोर्ट ने राजधानी के निवासियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस वैश्विक सूची में लखनऊ को दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है।

डब्लूएचओ की सीमा से 10 गुना ज्यादा प्रदूषण रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि लखनऊ की हवा में प्रदूषण का स्तर (पीएम 2.5) सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा ऊपर जा चुका है। यहाँ सालाना औसत प्रदूषण 54.2 दर्ज किया गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय मानक से 10 गुना अधिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि हम हर सांस के साथ अपने फेफड़ों में खतरनाक कण भर रहे हैं।

क्यों बिगड़ रही है शहर की सेहत? विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने प्रदूषण के तीन सबसे बड़े कारण बताए हैं। जिनमें शहर की सड़कों पर उड़ती धूल हवा को भारी बना रही है। गाड़ियों की बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाला जहरीला धुआं सीधा हमारी सांसों में घुल रहा है। शहर में जगह-जगह चल रहे कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स से उड़ने वाले सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहे हैं।

बीमारियों का बढ़ता खतरा डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रदूषित हवा केवल धुंध नहीं है, बल्कि बीमारियों का घर है। पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण सीधे खून तक पहुँच जाते हैं, जिससे अस्थमा, दिल का दौरा, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

देश की स्थिति लखनऊ की हालत केवल दुनिया में ही नहीं, बल्कि देश में भी चिंताजनक है। भारत के 259 शहरों की तुलना करें, तो लखनऊ 34वें स्थान पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश के 11 अन्य शहर भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *