उत्तर प्रदेश पारिस्थितिकी और जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की बैठक में प्रदेश की 51 आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने की संस्तुति
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की पारिस्थितिकी और जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की छठी बैठक में प्रदेश की 51 महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने की संस्तुति प्रदान की गई है।
कल वन मुख्यालय के पारिजात सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता मा० राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत इन क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
गंगा किनारे बसे 14 जनपदों (जैसे प्रयागराज, कानपुर नगर, बलिया, बिजनौर आदि) में लगभग 750 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 23 प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने की सिफारिश की गई। महराजगंज, बलरामपुर, अयोध्या, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर स्थित 1130.653 हेक्टेयर में फैली 28 आर्द्रभूमियों पर भी प्राधिकरण ने अपनी सहमति व्यक्त की है।
बैठक में अवगत कराया गया कि पूर्व में 20 आर्द्रभूमियों को आरंभिक स्तर पर अधिसूचित किया जा चुका है, जबकि 30 अन्य पर प्रक्रिया जारी है।
आर्द्रभूमियों को “पृथ्वी के गुर्दे” (Kidneys of the Earth) के रूप में जाना जाता है। इनका अधिसूचना के दायरे में आना न केवल जल संचयन और भूजल स्तर सुधारने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को भी बनाए रखेगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में प्रमुख सचिव वी० हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, सचिव बी० चन्द्रकला सहित सिंचाई, ग्राम विकास, आवास एवं शहरी नियोजन और मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों के समन्वय से इन क्षेत्रों के प्रबंधन पर जोर दिया गया।

