ऐशबाग रामलीला मैदान में आयोजित चैती महोत्सव के तीसरे दिन
शनिवार को भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला
लखनऊ। ऐशबाग रामलीला मैदान में आयोजित चैती महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार को भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘तुलसी रंग मंच’ पर कोलकाता के भास्कर नाट्य कला केंद्र के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का ऐसा सजीव चित्रण किया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे।
लीला का शुभारंभ बाल कृष्ण द्वारा माता यशोदा को विराट स्वरूप के दर्शन कराने वाले प्रसंग से हुआ। जब नन्हे कान्हा ने मुख खोला, तो माता यशोदा को उसमें संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन हुए। इसके बाद कलाकारों ने माखन चोरी की शरारतों को मंच पर उतारा। ग्वाल-बालों संग मटकी फोड़ना और गोपियों का उलाहना लेकर यशोदा मैया के पास पहुँचना, इन दृश्यों ने ब्रज की गलियों की याद ताजा कर दी।
राधा-कृष्ण का दिव्य मिलन और कालिया मर्दन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण राधा और श्रीकृष्ण का मिलन रहा। इस मंचन ने निस्वार्थ और आध्यात्मिक प्रेम की ऐसी छटा बिखेरी कि ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात् द्वापर युग उतर आया हो। वहीं, श्रीकृष्ण द्वारा यमुना को शुद्ध करने के उद्देश्य से किया गया कालिया मर्दन न केवल वीरता का प्रतीक बना, बल्कि समाज को नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश भी दे गया। इसके अतिरिक्त, प्रभु ने बगुले का रूप धारण कर आए असुर बकासुर का वध कर गोकुल वासियों की रक्षा की।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
मंच पर भक्ति और नृत्य की जुगलबंदी भी देखने को मिली। जिसमें मलखान सिंह, मौसमी भारती, लवली घिल्डियाल और उनकी टीम ने सुमधुर भजनों पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। पर्णिका श्रीवास्तवा एवं उनके समूह द्वारा ‘कालिया दमन’ और ‘महारास’ पर आधारित कथक नृत्य नाटिका पेश की गई। इसमें संगीत और पदचाप के माध्यम से अहंकार के विनाश और गोपियों संग रास का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया।
कल के मुख्य आकर्षण ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया कि रविवार को महोत्सव में कंस-चाणूर संवाद, नारद-कंस संवाद, ब्रज की लठमार होली, गोवर्धन लीला और भव्य महारास मुख्य आकर्षण होंगे।
