कांशीराम जयंती: मायावती का विपक्ष पर तीखा प्रहार, बोलीं— ‘सपा का पीडीए सिर्फ चुनावी छलावा’

Anoop

March 15, 2026

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 92वीं जयंती पर

बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजधानी लखनऊ में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 92वीं जयंती के अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजधानी लखनऊ में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा), भाजपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और दलित-पिछड़ा वर्ग को विरोधी दलों के “छलावे” से सावधान रहने की चेतावनी दी।

मॉल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मायावती ने सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि  विरोधी दलों को इन वर्गों और महापुरुषों की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है। सत्ता मिलते ही ये दल इन वर्गों का तिरस्कार करने लगते हैं।

मायावती ने दावा किया कि मुस्लिम समाज अब इन पार्टियों से अलग हो रहा है और ब्राह्मण समाज भी तेजी से बसपा के साथ जुड़ रहा है, जिससे सपा में “राजनीतिक और जातिवादी बैर” बढ़ रहा है।

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से मिशनरी अंबेडकरवादी बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस की तरह सपा भी बहुजन समाज की हितकारी नहीं है। “इन दलों से कल्याण की आशा करना रेगिस्तान में पानी तलाशने जैसा है। निजी स्वार्थ के लिए पार्टी से दगा करने वालों से दूरी बनाएं और वोट की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें।”

लखनऊ से नोएडा तक शक्ति प्रदर्शन

कांशीराम जयंती पर बसपा ने उत्तर प्रदेश सहित 8 राज्यों में बड़े कार्यक्रमों के जरिए अपनी ताकत दिखाई। लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर 12 मंडलों के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा, जिसे प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने संबोधित किया। नोएडा में 6 मंडलों के समर्थकों ने एकजुटता दिखाई। राजस्थान में  पार्टी के केंद्रीय संयोजक आकाश आनंद ने भरतपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर चुनावी बिगुल फूंका।

कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की मांग

मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की तरह वर्तमान भाजपा सरकार भी मान्यवर कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने में देरी न करे। उन्होंने कहा कि समतामूलक समाज के निर्माण में कांशीराम का योगदान ऐतिहासिक है और वे करोड़ों लोगों के दिलों में बसते हैं।

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