उत्तर प्रदेश में जल्द ही ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का स्वरूप बदलेगा
‘मोटर वाहन नियम, 1989’ में किए गए संशोधनों को अब यूपी के ई-चालान सिस्टम में लागू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल्द ही ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का स्वरूप बदलने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा ‘मोटर वाहन नियम, 1989’ में किए गए संशोधनों को अब यूपी के ई-चालान सिस्टम में लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इन नए नियमों का सीधा मकसद उन ‘आदतन अपराधियों’ पर लगाम लगाना है जो दर्जनों चालान पेंडिंग होने के बावजूद बेखौफ सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते हैं।
नए नियमों के तहत चालान की प्रक्रिया को न केवल सख्त, बल्कि समय का पाबंद भी बना दिया गया है। यदि कोई वाहन मालिक ट्रैफिक चालान को गलत मानता है और उसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो उसे अब पहले जुर्माने की 50% राशि जमा करनी होगी। इसके बिना मामला आगे नहीं बढ़ेगा।
चालान के खिलाफ विरोध दर्ज करने का समय अब 90 दिन से घटाकर मात्र 45 दिन कर दिया गया है। यानी अब आपको अपनी बात रखने के लिए कम समय मिलेगा। चालान कटने के 3 दिनों के भीतर वाहन मालिक को SMS या ईमेल के जरिए सूचना दे दी जाएगी, जबकि 15 दिनों के भीतर आधिकारिक नोटिस घर पहुंच जाएगा।
पेंडिंग चालान तो रुक जाएंगी आरटीओ की सारी सेवाएं
परिवहन विभाग ने अब बिना भुगतान वाले चालान को वाहन की अन्य सेवाओं से लिंक कर दिया है। जब तक आपके पुराने चालान क्लियर नहीं होंगे, आप नीचे दी गई सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे। मसलन ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी के रजिस्ट्रेशन का आवेदन। गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन चेक । गाड़ी का परमिट या इंश्योरेंस से जुड़ी औपचारिकताएं।
प्रवर्तन अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला उन गंभीर मामलों को देखते हुए लिया गया है जहां भारी जुर्माने के बावजूद गाड़ियां हाईवे पर हादसे का सबब बन रही थीं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाग्रस्त हुई एक बस पर 67 चालान बकाया थे, जिनका कुल जुर्माना ₹6 लाख तक पहुंच चुका था। आगरा एक्सप्रेसवे पर एक अन्य बस पर 81 चालान होने के बावजूद वह धड़ल्ले से सड़क पर चल रही थी।
आरटीओ प्रभात पांडे का कहना है कि नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के साथ मिलकर इस सिस्टम को जल्द ही पूरी तरह एक्टिव कर दिया जाएगा। अब सड़क पर गाड़ी चलाने का मतलब होगा—नियमों का पालन अनिवार्य है, वरना जेब पर भारी बोझ पड़ना तय है।

