सीएम योगी ने संतों के वेश में छिपे दुश्मनों से सावधान रहने की दी चेतावनी

Prashant

January 23, 2026

सोनीपत के मुरथल के बाबा नागवाला धाम में हुए नाथ परंपरा के कार्यक्रम में की शिरकत

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कई गंभीर विषयों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया

लखनऊ/सोनीपत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म और राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। सोनीपत के मुरथल स्थित बाबा नागवाला धाम में आयोजित नाथ परंपरा के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए, उन्होंने समाज को उन तत्वों से आगाह किया जो धार्मिक चोले में धर्म को नुकसान पहुँचा रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने रामायण के पात्र ‘कालनेमि’ का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उस राक्षस ने हनुमान जी को रोकने के लिए साधु का वेश धरा था, वैसे ही आज कुछ लोग संतों के वेश में सनातन धर्म के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा: “समाज को इन अवैध गतिविधियों के प्रति सजग रहना होगा। संतों को आगे आकर ऐसे तत्वों का मुकाबला करना चाहिए। एक योगी के लिए राष्ट्र ही उसका आत्म-सम्मान है और धर्म ही उसकी पूंजी है। यदि कोई राष्ट्रीय गरिमा को चुनौती देता है, तो उसके खिलाफ मुखर होना अनिवार्य है।”

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कई गंभीर विषयों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया कि लव जिहाद और धर्मांतरण: अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि “बेटियों” का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता के खिलाफ काम करने वालों के विरुद्ध उन्होंने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ बढ़ता विवाद

वहीं दूसरी ओर, माघ मेले में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन का नया नोटिस: मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने पूछा है कि मौनी अमावस्या के अवसर पर बिना अनुमति के संगम क्षेत्र में पालकी के साथ प्रवेश क्यों किया गया? 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रवक्ता ने सीएम योगी के ‘कालनेमि’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि वे किन लोगों को ‘कालनेमि’ कह रहे हैं और उनका इशारा किसकी तरफ है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का यह बयान सीधे तौर पर उन धार्मिक गुरुओं और संस्थाओं पर निशाना हो सकता है जो सरकार की नीतियों या विचारधारा के विपरीत खड़े दिखते हैं। ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग इस बहस को और अधिक गरमा सकता है, विशेषकर प्रयागराज माघ मेले में जारी विवाद के संदर्भ में।

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