अखिलेश बोले- शंकराचार्य और संतों का अपमान ‘सबसे बड़ा अधर्म’
जनेश्वर मिश्रा को श्रद्धांजलि अर्पित कर अखिलेश ने किया नमन
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में भाजपा सरकार की नीतियों और कार्रवाईयों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रयागराज में संतों के साथ हुए व्यवहार और संभल के न्यायिक स्थानांतरण को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच जारी गतिरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ‘अधर्म’ के रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य और संतों को संगम में पवित्र स्नान से रोकना सनातन धर्म का अपमान है।
अखिलेश का आरोप है कि सरकार नौकरशाहों के माध्यम से संतों को नोटिस भेजकर दबाव बना रही है। उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “एक ऐसी सरकार में जहाँ मुख्यमंत्री स्वयं योगी हैं, वहाँ संतों और महात्माओं को अपमानित किया जा रहा है और उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है।” यह बयान अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी नेता स्वर्गीय जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर उनके नाम पर बने पार्क में पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद दिया। इस अवसर पर उनके साथ शिवपाल यादव, माता प्रसाद पांडे और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
संभल हिंसा और सीजेएम का स्थानांतरण
संभल में शाही जामा मस्जिद के पास हुई हिंसा और उसके बाद हुए न्यायिक फेरबदल पर भी अखिलेश यादव ने अपनी चिंता व्यक्त की। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) का स्थानांतरण उन 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के कुछ दिनों बाद हुआ, जिन पर हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने का आरोप था।
अखिलेश ने कहा कि इस तरह के अचानक हुए न्यायिक फेरबदल का संज्ञान सुप्रीम कोर्ट (SC) और हाई कोर्ट (HC) को लेना चाहिए। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया। संतों के साथ दुर्व्यवहार को ‘सनातन धर्म’ का अपमान बताया। संभल के न्यायिक स्थानांतरण को संदेहास्पद करार देते हुए उच्च न्यायालयों के हस्तक्षेप की मांग की। जनेश्वर मिश्रा की विरासत को याद करते हुए समाजवादी मूल्यों पर जोर दिया।

