ऐतिहासिक बदलाव: उत्तर प्रदेश का ‘राजभवन’ अब कहलाएगा ‘जन भवन’

Prashant

January 21, 2026

ऐतिहासिक निर्णय: अब ‘कोठी हयात बख्श’ और ‘राजभवन’ के बाद ‘जन भवन’ के नाम से जाना जाएगा राज्यपाल निवास

औपनिवेशिक विरासत को अलविदा: गृह मंत्रालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में ‘जन भवन’ युग की शुरुआत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा राज्यपालों के आधिकारिक आवासों के नामकरण के मानकीकरण के निर्देशों के बाद, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के आवास का नाम बदल दिया गया है। अब इसे ‘राजभवन’ के बजाय ‘जन भवन’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अब सभी आधिकारिक, शासकीय तथा वैधानिक कार्यों के लिए इसी नाम का प्रयोग किया जाएगा। यह निर्णय औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने और लोकतंत्र में ‘राज’ के स्थान पर ‘जन’ (जनता) को प्राथमिकता देने की भावना से प्रेरित है।

राजभवन का गौरवशाली सफर: नवाबों के दौर से लोकतंत्र तक

उत्तर प्रदेश के इस भवन का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और दिलचस्प रहा है। यह इमारत मात्र एक सरकारी आवास नहीं है, बल्कि अवध के नवाबों के वैभव से लेकर ब्रिटिश हुकूमत के संघर्ष और आधुनिक भारत के लोकतंत्र तक की गवाह रही है।

कोठी हयात बख्श (प्रारंभिक दौर)

इस आलीशान इमारत की नींव 18वीं शताब्दी के अंत (लगभग 1798 ई.) में अवध के नवाब सआदत अली खान के काल में रखी गई थी। उस समय इसे ‘कोठी हयात बख्श’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है— ‘जीवन देने वाला’। इसका नक्शा फ्रांसीसी मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन ने तैयार किया था, जिसमें भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

ब्रिटिश काल और ‘बैंक कोठी’

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद यह कोठी ब्रिटिश अधिकारियों के नियंत्रण में आ गई। इसे बैंक कोठी के नाम से भी जाना गया क्योंकि यहाँ लखनऊ के तत्कालीन कमिश्नर मेजर जॉनशोर बैंक निवास करते थे। इतिहास के पन्नों में यह भी दर्ज है कि बहादुर शाह जफर के बेटों की हत्या करने वाले मेजर हडसन ने इसी कोठी में अपनी अंतिम सांस ली थी।

गवर्नमेंट हाउस से राजभवन तक

वर्ष 1921 में जब लखनऊ को संयुक्त प्रांत (United Provinces) की राजधानी बनाया गया, तब इस इमारत को ‘गवर्नमेंट हाउस’ का नाम दिया गया। आजादी के बाद, 1947 में इसका नाम बदलकर राजभवन कर दिया गया। भारत की पहली महिला राज्यपाल, श्रीमती सरोजिनी नायडू, इस ऐतिहासिक भवन में निवास करने वाली पहली राज्यपाल बनीं।

जन भवन: एक नए युग की शुरुआत

दिसंबर 2025 के बाद से केंद्र सरकार की नई नीति के तहत औपनिवेशिक शब्दावली को बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी क्रम में अब ‘राज’ शब्द को हटाकर इसे जन भवन का नाम दिया गया है, जो सीधे तौर पर जनता के प्रति उत्तरदायी शासन का प्रतीक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *